नाई के भेष में पाकिस्तान में, तो रिक्शेवाले के भेष में भारत में आतंकियों से किया मुकाबला, एनएसए अजित डोभाल के बारें में 8 बेहद खास बातें

किसी भी देश के लिए सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा होता हो. ऐसे में अगर आपके पास पाकिस्तान जैसे दुश्मन हो तो असुरक्षा का खतरा और भी बढ़ जाता है. आज जब भी देश की सुरक्षा की बात आती है तो एक चेहरा अपने आप हमारे सामने आ जाता है- एनएसए यानी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का. 31 मई 2014 को डोभाल देश के 5वें एनएसए बने. फिलहाल अजित डोभाल देश के नंबर वन जासूस हैं साथ ही देश में आतंकियों के खिलाफ जो भी बड़े ऑपरेशन हो रहे हैं उनकी कमान डोभाल के हाथ में ही होती है आईए जानते हैं डोभाल के बारें में सबकुछ-

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1.महज 23 साल की उम्र में बनें आईपीएस ऑफिसर
अजित डोभाल उत्तराखंड के पौरी गढ़वाल के रहने वाले हैं. डोभाल का जन्म 1945 में हुआ था. साल 1968 में 23 साल की उम्र में डोभाल आईपीएस ऑफिसर बने उन्हें केरल कैडर मिला. 4 साल बाद ही डोभाल इंटेलिजेंस ब्यूरों में आ गया. अपने शानदार करियर के दौरान डोभाल ने ज्यादातर समय खुफिया विभागों में जासूस के तौर पर ही बिताया है.

2.कीर्ति चक्र पाने वाले पहले पुलिस अधिकारी
अजित डोभाल सबसे कम उम्र में पुलिस पदक पाने वाले अधिकारी रहे हैं. साथ ही वो ऐसे पहले पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें सैन्य कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया.

3.7 साल पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट रहे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डोभाल भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के लिए बतौर अंडरकवर एजेंट का काम कर चुके हैं. डोभाल 7 साल तक पाकिस्तान में एक मुस्लिम शख्स के तौर पर रहे जो बाल काटने यानी नाई का काम करता था.

4.मिजो नेशनल फ्रंट को खत्म ही कर दिया
80 के दशक में मिजो नेशनल फ्रंट का उग्रवाद अपने उफान पर था. फिर कमान डोभाल को सौंपी गई. डोभाल ने इस फ्रंट के 7 में से 6 कमांडरों को अपनी तरफ कर लिया. और फिर मिजो नेशनल फ्रंट इतिहास बन गया.

5.ऑपरेशन ब्लू स्टार में रिक्शावाला बने थे डोभाल
1984 मेंअमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आतंकी हमले के जवाब में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में अजित डोभाल ने बड़ी भूमिका निभाई. डोभाल रिक्शा वाले बनकर मंदिर के अंदर गए और आतंकियों से पूरी जानकारी हासिल की और सेना को दी. इसे कहते हैं असल जिंदगी का सुपरहीरो.
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6. ऑपरेशन ब्लैक थंडर के हीरो रहे डोभाल
1999 में हुए कंधार प्लैन हाइजैक की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया, आतंकियों से बातचीत में तत्कालीन सरकार ने डोभाल पर पूरा भरोसा दिखाया और डोभाल आतंकियों से बात करने वाले मुख्य वार्ताकार के तौर पर गए.

7.म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादियों को खत्म किया
कई सालों से नॉर्थ ईस्ट में उग्रवाद चरम पर था. 2015 में मणिपुर में आर्मी काफिले पर हमला हुआ और कई जवान शहीद हुए. इसका बदला लेने की जिम्मेदारी डोभाल को दी गई. इसके बाद डोभाल के रणनीति की अगुवाई में सेना ने म्यांमार की सीमा में घुसकर कई उग्रवादियों को खत्म कर दिया.

8. एलओसी पार सर्जिकल स्ट्राइक, 28 सितंबर 2016
उरी हमले में देश के 20 जवान शहीद हो गए थे. पूरा देश गुस्से से उबल रहा था. वहीं अजित डोभाल को बदला लेने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंप दी गई और महज 10 दिन बाद ही 28-29 सितंबर की आंधी रात में सेना ने एलओसी पार सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया. करीब 50 आतंकी मारे गए. दुश्मन देश पाकिस्तान के 7 आतंकी कैंप तहस नहस हो गए.

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