जन्मदिन विशेष- भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के कॉलेज के दिनों से लेकर अब तक के सफर की 8 सबसे खास बातें..About Atal Bihari Vajpayee in Hindi

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी एक राजनेता से कहीं ऊपर थे. वाजपेयी जी ने बतौर साहित्यकार, कवि, पत्रकार और कुशल वक्ता भी भारत को बहुत कुछ दिया है. वाजपेयी जी की भाषण शैली का हर कोई मुरीद था, पंडित नेहरु, इंदिरा गांधी दूसरे पार्टियों के होने के बावजूद उनकी शैली के प्रशंसक थे. यहां तक कि पंडित नेहरु ने बहुत पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि अटल बिहारी वाजपेयी एक ना एक दिन भारत के प्रधानमंत्री जरूर बनेंगे. वाजपेयी अब राजनीतिक रुप से सक्रिय नहं हैं लेकिन उनका मार्गदर्शन अभी भी राजनेताओं को मिलता रहता है. ऐसे में जानते हैं वाजपेयी जी के जीवन के बारें में-

कॉलेज में वाजपेयी जी की कविता के सब दीवाने थे.
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था. वाजपेयी जी की शिक्षा दीक्षा उत्तरप्रदेश के कानपुर में हुई. कॉलेज के समय से ही वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए. कानपुर में कॉलेज के समय वाजपेयी जी की कविता सुनने के लिए लड़के-लड़कियां भारी संख्या में जुट जाते थे.

भारत छोड़ो आंदोलन में भाई के साथ गए थे जेल

साल 1942 में भारत छोड़ों आंदोलन के दौरान वाजपेयी जी लॉ की पढ़ाई कर रहे थे. पढ़ाई बीच में ही छोड़कर वो स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े. उन्हें और उनके भाई को तब 23 दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा था.

सौजन्य- इंडियन एक्सप्रेस



पहली बार लोकसभा का चुनाव हार गए थे

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं. 1955 में अटलजी ने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. साल 1957 में उन्होंने तीन जगहों से लोकसभा का चुनाव लड़ा, जिसमें लखनऊ और मथुरा से वो हार गए लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर पहली बार संसद पहुंचे.

1977 में विदेश मंत्री बने
1977 से 1979 के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी देश के विदेश मंत्री रहे. खास बात ये है कि वाजपेयी देश के पहले गैर कांग्रेसी विदेश मंत्री थे. अपने कार्यकाल के दौरान वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया था. जिसके लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है. ऐसा पहली बार था जब कोई भारतीय नेता संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दे रहा हो.

देश के चहेते प्रधानमंत्री रहें
16 मई 1996 में वो पहली बार देश के प्रधानमंत्री बनें, लेकिन 31 मई को ही बहुमत ना साबित कर पाने के कारण ये सरकार गिर गई. फिर साल 1998 में अटलजी दोबारा देश के प्रधानमंत्री बनें और बखूबी 5 साल सरकार को चलाया. खास बात ये है कि वाजपेयी जी की इस सरकार में 24 दलों का गठबंधन था. ऐसे में सरकार को बिना मतभेद से चला पाना सिर्फ अटलजी के ही बस की बात थी.

परमाणु परीक्षण कर दुनिया को दिखाया भारत का जलवा
साल 1998 में पोकरण परमाणु परीक्षण हुआ. उस दौरान पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर थी. अमेरिका भी नहीं चाहता था ये परीक्षण हो, लेकिन अटलजी के संकल्प ने भारत को दूसरे परमाणु शक्तियों के श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया.

दिग्गज कवि और साहित्यकार हैं अटलजी
अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी रचनाओं के लिए भी उतनी ही प्रशंसा मिलती थी जितना की बतौर राजनीतिज्ञ, उनकी कविताओं का संग्रह आज भी काफी मशहूर है.

राजकुमारी कौल और अटल बिहारी वाजपेयी
वैसे तो वाजपेयी जी पूरी जिंदगी अविवाहित रहे. लेकिन वाजपेयी जी औऱ राजकुमारी कौल का नाम हमेशा से एक साथ जोड़ा जाता रहा, और उनकी खबरें सुर्खियों में भी रहीं. राजकुमारी कौल अब दुनिया में नहीं है, खबरों के मुताबिक राजकुमारी कौल और अटलजी कॉलेज से एक दूसरे को जानते थे. वाजपेयी जी और राजकुमारी कौल अक्सर कार्यक्रमों में भी साथ देखे जाते रहे हैं.

Comments

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *