कभी दो कमरे के मकान में 8 भाई-बहनों के साथ रहने वाली मायावती अब यूपी की सियासत के बड़े चेहरों में शुमार हैं..Everything about Mayawati

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य की बड़ी पार्टियों में बीएसपी शुमार है जो कई बार सूबे का बागडोर संभाल चुकी है. मायावती बीएसपी की सर्वेसर्वा हैं. हाल ही में मायावती के भाई आनंद कुमार पर करोड़ों की संपत्ति जुटाने का आरोप लगा है. साथ ही पार्टी पर भी पैसे जुटाने के आरोप लग रहे हैं. ऐसे में बीएसपी और मायावती की राह आसान नहीं है. चाहें इस विधानसभा चुनाव के नतीजे जो भी हो, लेकिन यूपी की राजनीति में मायावती का रसूख कम नहीं होगा, आइए जानते हैं फर्श से अर्श तक पहुंचने वाली मायावती के बारें में हर वो बात जो आप शायद नहीं जानते होंगे-

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1.दिल्ली में जन्मी मायावती ने यूपी में कमाए नाम
मायावती का जन्म साल 1956 में दिल्ली में हुआ था. मायावती के पिता प्रभु दास पोस्ट ऑफिस में बतौर क्लर्क तैनात थे. आनंद कुमार समेत मायावती के 6 भाई और दो बहनें हैं.

2.आईएएस बनना चाहती थीं मायावती
कई बार यूपी की मुख्यमंत्री रही मायावती कभी प्रशासनिक सेवा में आना चाहती थी. आईएएस बनना चाहती थी मायावती. दिल्ली के इंद्रपुरी के दो कमरे के मकान में उनका पूरा परिवार रहता था. किसी को क्या पता था कि एक दिन ये लड़की देश के सबसे सियासी सूबे की मुख्यमंत्री भी बनेगी.

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3.हालात ने शिक्षक बनाया
आईएएस बनने का ख्वाब देखने वाली मायावती ने मुफलिसी के दौर में पहले बीएड किया, दिन में मायावती बच्चों को पढ़ाती थी और रातभर पढ़ाई किया करती थी. हालात ऐसे बन गए कि मायावती को बतौर शिक्षक ही काम करना पड़ा. इसी दौरान उन्होंने लॉ में स्नातक भ किया.

4.एक भाषण ने बदल दी मायावती की किस्मत
कहा जा सकता है कि अगर कांशीराम नहीं होते तो आज मायावती कुछ भी नहीं होती. कांशीराम की नजर मायावती पर साल 1977 में कांस्टीट्यूशन क्लब में पड़ी. जब केंद्रीय मंत्री राजनारायण सिंह पर हरिजन शब्द को लेकर मायावती टूट पड़ी. माय़ावती ने कहा- बाबा साहेब हरिजन शब्द को नहीं मानते थे, अनुसूचित जाति शब्द का प्रयोग होना चाहिए.

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5.कांशीराम के शब्दों ने मायावती को राजनेता बनाया
मायावती के दमदार भाषण के बाद खुद कांशीराम मायावती से उनके घर मिलने पहुंचे और उन्हें राजनीति में आने को प्रेरित किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक कांशीराम ने तब कहा था कि आज तुम कलेक्टर बनना चाहती हो, मैं तुम्हें वो शख्सियत बनाऊंगा कि तुम्हारे आगे पीछे कई कलेक्टर फाइल लेकर घूमा करेंगे.

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6.कांशीराम की प्रेरणा के बाद मायावती ने घर छोड़ा
बेटी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को देखकर मायावती के पिता प्रभु दास परेशान रहा करते थे, और बस एक दिन मायावती ने कुछ पैसे और कपड़े के साथ अपना घर छोड़ दिया और पूरी तरह से राजनीति में रच बस गई.

7.कौन थे कांशीराम
कांशीराम मूलरुप से पंजाब के रहने वाले थे. साल 1958 में वो पुणे आ गए थे. वहां कांशीराम गोला-बारुद की फैक्ट्री में बतौर लैब असिस्टेंट काम करने लगे थे. लेकिन महाराष्ट्र में भेदभाव की घटनाओं से क्षुब्द होकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी, और दलित चेतना में जुट गए. फिलहाल उनका देहांत हो चुका है, और उनकी विरासत मायावती संभाल रही हैं.

8.राजनीति की बुलंदियों पर मायावती

14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी की नींव रखी गई थी. साल 1989 में मायावती ने बिजनौर विधानसभा से चुनाव जीता. फिर उसके बाद मायावती ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, 3 बार वो सूबे की मुख्यमंत्री रहीं.

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