जब नौजवान मुलायम ने मंच पर ही दारोगा को पटक कर मारा था…जानिए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के बारें में 8 बेहद खास बातें..Everything about Mulayam Singh Yadav

साल 1960 में मैनपुरी के जैन इंटर कॉलेज में कवि सम्मेलन चल रहा था. उस समय के मशहूर कवि दामोदर स्वरूप ‘विद्रोही’ अपनी कविता ‘दिल्ली की गद्दी सावधान’ सुना रहे थे, अचानक पुलिस का एक दारोगा मंच पर चढ़ा और विद्रोही जी से माइक छीनकर बोला- शासन के खिलाफ ऐसी कविताएं बंद करो. ठीक उसी समय एक पहलवान सा दिखने वाला नौजवान तेजी से मंच पर आया और दारोगा को मंच पर ही उठाकर पटक दिया. ये जवान कोई और नहीं मुलायम सिंह यादव ही थे. देश के सबसे बड़े सियासी परिवार के पुरोधा. वो सियासी परिवार जो अब बिखर गया है. अखिलेश अब अपने पिता मुलायम से अलग है पारिवारिक तौर पर भी और राजनीतिक तौर पर भी.
आइए जानते हैं मुलायम सिंह यादव के पारिवारिक और राजनीतिक जीवन के बारें में हर वो बात जो आप जानना चाहते हैं-

मुलायम को पहलवान बनाना चाहते थे पिता
मुलायम सिंह का जन्म 22 नवंबर 1939 को यूपी के इटावा जिले के सैफई गांव में हुआ था. पांच भाई बहनों में मुलायम तीसरे नंबर के थे. मुलायम के पिता सुघर सिंह किसान थे, वो मुलायम को पहलवान बनाना चाहते थे. मुलायम ने अच्छी खासी पहलवानी भी कि और अपने राजनीतिक गुर नत्थूसिंह को मैनपुरी में पहलवानी से ही प्रभावित किया.

कॉलेज में टीचर भी रहे हैं मुलायम
राजनीति में आने से पहले मुलायम सिंह आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और जैन इन्टर कालेज, मैनपुरी से बी0 टी0 करने के बाद मुलायम बतौर शिक्षक भी काम कर चुके हैं.

राजनीति में पहला कदम
साल 1954 में महज 15 साल की उम्र में ही मुलायम के राजनीतिक तेवर उस वक़्त देखने को मिला, जब उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के ‘नहर रेट आंदोलन’ में भाग लिया और पहली बार जेल गए. इसके बाद महज 28 साल की उम्र में ही 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधानसभा सदस्य य़ानी विधायक चुने गए.

सौजन्य- https://m.tahlkanews.com/archives/87207


1989 में पहली बार सूबे के मुख्यमंत्री बनें
आज मुलायम बीजेपी के धुर विरोधी हैं लेकिन 5 दिसंबर, 1989 को 53 वर्ष की उम्र में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से ही मुलायम पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन पाए थे.मुलायम सिंह यादव 1989 से 1991 तक, 1993 से 1995 तक और साल 2003 से 2007 तक तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं.


‘बगावती’ बेटे के लिए छोड़ी थी कुर्सी
अखिलेश यादव अब अपनी नई राह बनाने की ओर दिख रहे हैं लेकिन साल 2013 में मुलायम ने खुद ही उन्हें सत्ता की कमान सौंपी थी. उस समय भी चाचा शिवपाल, मुलायम सिंह यादव के इस फैसले से नाराज नजर आए थे.

मुलायम-साधना की मुलाकात
मुलायम ने दो शादी की है. पहली पत्नी मालती देवी के बेटे हैं अखिलेश यादव, वहीं दूसरी पत्नी साधना गुप्ता यादव के बेटे हैं प्रतीक यादव. शादीशुदा मुलायम से साधना की मुलाकात 1982 में हुई जब मुलायम लोकदल के अध्यक्ष और साधना एक आम कार्यकर्ता थी.

सौजन्य- http://www.mahashakti.org.in/


परवान चढा मुलायम-साधना का प्यार
साधना भी पहले से शादीशुदा थीं, उनके पति थे कारोबारी चंद्रप्रकाश गुप्ता, लेकिन मुलायम साधना को दिल दे बैठे थें, और ये बात अमर सिंह के अलावा शायद कोई नहीं जानता था. साल 1988 में साधना ने प्रतीक को जन्म दिया अब धीरे धीरे बात बाहर आने लगी थी. साल 2007 में मुलायम ने सार्वजनिक तौर पर माना कि साधना उनकी पत्नी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अखिलेश को उस समय ये शादी नापंसद थी. अब भी साधना गुप्ता के बारें में कहा जाता है कि वो मुलायम और पार्टी के राजनीतिक मामलों में दखल रखती हैं.

विवादों से रहा है नाता

अब परिवार में विवाद है, ये विवाद थोड़ा अलग है लेकिन मुलायम सिंह यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है. 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन हुआ, कुछ ही दिनों बाद बीएसपी से गठंबधन हुआ,लेकिन फिर पार्टी का नाम गेस्टहाउस कांड से जुड़ गया. उत्तराखंड के निर्माण को लेकर भी मुलायम विवादों में रहे.

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