दिहाड़ी मजदूर का बेटा कैसे बना करो़ड़पति, मुस्तफा की सफलता की कहानी

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दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने मेहनत के बलबूते अपनी किस्मत को बदलकर रख देते हैं. ऐसे ही हैं ‘आईडी फ्रेश फूड’ के CEO पी सी मुस्तफा. इनकी कहानी किसी फिल्मी सफर से कम नहीं हैं. जानिए एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे से 100 करोड़ के मालिक बनने का उनका पूरा सफर.

मुस्तफा
पीसी मुस्तफा

बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं मुस्तफा

मुस्तफा का जन्म केरल के वयनाड गांव में हुआ था. उनके पिता अहमद कॉफी के बगीचे में माल ढोने का काम करते थे. बचपन में Mustafa के पिता चाहते थे कि वो भी माल ढोने का काम करें, लेकिन मुस्तफा कुछ अलग करना चाहते थे. Mustafa का गांव इस कदर पिछड़ा था कि वहां पढ़ाई के लिए केवल एक प्राइमरी स्कूल था. वहां न तो सड़कें थीं और न ही बिजली. स्कूल जाने के लिए उन्हें 4 किलोमीटर दूर पैदल ही जाना पड़ता था. अधिकतर बच्चे प्राइमरी के बाद पढ़ना बंद कर देते थे.

पढ़ाई छोड़नी पड़ रही थी

आर्थिक हालात सही नहीं होने के कारण Mustafa को भी पढ़ाई छोड़ना पड़ सकता था. लेकिन उनके गणित के शिश्रक मैथ्यू ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने को कहा. छठीं कक्षा में वो फेल हो गए लेकिन सातवीं में टॉप कर लिया. इसके बाद हाईस्कूल की परीक्षा में भी वो पूरे स्कूल में अव्वल आए. इस समय तक मुस्तफा गणित के शिक्षक बनना चाहते थे.

कोलकाता से ENGINEERING, IIM से MBA

स्कूल पास करके मुस्तफा ने कोलकाता से इंजीनियरिंग की. इसके बाद उन्हें कई MNC में काम करने का मौका मिला. उनकी नौकरी लग गई. उन्हें कई मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने का मौका मिला. करीब 7 साल तक एक एमएनसी में नौकरी करने के बाद मुस्तफा भारत लौटे. IIM में एडमिशन पाना आसान नहीं, पर उन्होंने MBA करने की ठानी और IIM बेंगलुरु में एडमिशन ले लिया. मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान ही उनके दिमाग में उस बिजनेस आइडिया आया, जो आगे चलकर एक ग्लोबल कारोबार में तब्दील हुआ.

25 हजार में बिजनेस, आज 100 करोड़ के मालिक

फिर मुस्तफा ने महज 25 हजार रुपयों से ‘पैकेज्ड इडली और डोसा के रेडी टू मेक’ बनाने वाली कंपनी ‘आईडी’ शुरू की. शुरुआत में वे खुद 20 स्टोर्स जाकर रोजाना 100 पैकेट की डिलिवरी करते थे. वक्त के साथ उनका बिजनेस बढ़ता चला गया और आज कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ के पार हो चुका है.

ग्रामीण युवाओं को देते हैं नौकरी

मुस्तफा अगले पांच सालों में कंपनी का टर्नओवर 1000 करोड़ तक पहुंचाना चाहते हैं. आज उनकी कंपनी में एक हजार से ज्यादा लोग काम करते हैं. अाज वह 1,100 को रोजगार दे रहे हैं. पांच-छह साल में उनका लक्ष्य कम से कम 5,000 लोगों को रोजगार देने का है. खास बात ये है कि मुस्तफा सिर्फ ग्रामीण युवाओं को ही अपने यहां नौकरी देते हैं.

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