गजब दर्शन: रायपुर का ये ‘नुक्कड़ चाय कैफे’ है बेहद खास, स्टाफ तो यहां बेमिसाल हैं

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कुछ अलग करने की चाहत हो या समाज बदलने का जुनून हो तो रास्ते मिल ही जाते हैं. ऐसा ही रास्ता खुद के लिए रायपुर के प्रियंक पटेल ने बनाया है. 32 साल के प्रियंक ने RAIPUR में एक अनोखी पहल शुरू की है. जानते हैं कुछ बेहद खास बातें-

सौजन्य-The Better India

नुक्कड़ चाय कैफे, RAIPUR : गजब का एहसास

प्रियंक ने रायपुर में नुक्कड़ चाय कैफे खोला है. आम कैफे से अलग यहां सिर्फ चाय का मजा ही नहीं लिया जाता, साथ ही किताबों की दुनिया में घूमने, कविताएं सुनने-सुनाने, नए लोग से मिलने-मिलाने का गजब अहसास मिलता है.

सिर्फ स्पेशल लोगों को ही मिलती है नौकरी

नुक्कड़ चाय कैफे में सिर्फ ऐसे ही लोगों पर नौकरी पर रखा जाता है जो सुनने, बोलने में अक्षम हैं. RAIPUR में नुक्कड़ के दो ब्रांच है जिसमे कुल 8 कर्मचारी ऐसे हैं जो सुन और बोल नहीं सकते.

प्रियंक का कहना है कि इसके पीछे इनका मकसद है समाज के लिए एक नए अंदाज में कुछ करना. यहाँ के स्टाफ सांकेतिक भाषा में बात करते हैं. स्टाफ का मानना है कि अगर ये भाषा कोई शख्स सीखता है तो आगे चलकर उसे फायदा ही होगा, साथ ही स्टाफ का खुद का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा.
कैफे में चाय और नाश्ते का साथ आपको यहां वाद-विवाद, किसी विषय पर चर्चा करने जैसे मौके मिलते हैं. कैफे के ही तरफ से विशेष कार्यक्रमों का भी आयोजन कराया जाता है.

नुक्कड़ चाय कैफे के नियम कानून

बिल बाय दिल: ये कैफ़े अपनी सालगिरह ‘बिल फ्री डे’ के रूप में मनाता है. ग्राहको को एक खाली लिफाफा देकर कहा जाता है कि अपनी खुशी से पैसे डाल दे.
ज्ञान दान: कैफे में लोग किताब जमा करते हैं साथ ही बदले में यहां की कोई किताब 3 दिन के लिए अपने साथ ले जा सकते हैं.
DIGITAL बंदी: ये कैफे ऐसे लोग को छूट देता है जो अपना फोन यहां आने पर जमा कर देते हैं.
सुपर मॉम सेलिब्रेशन: अगर कोई शख्स अपनी मां को साथ लेकर यहां आता है तो उनकी मां को फ्री में डिश दिया जाता है.
टी & टोन्स: यहाँ ऐसे आयोजन किए जाते हैं, जहाँ कोई भी ग्राहक माइक पर अपने पसंद की कविता सुना सकता है.

कौन हैं प्रियंक ?

इंजीनियर तो हमेशा स्टार रहे हैं. प्रियंक भी पेशे से इंजीनियर हैं. 32 साल के प्रियंक इससे पहले एक कंपनी में काम कर चुके हैं. इसके बाद उन्होंने एक फेलोशिप में भी हिस्सा लिया. इसी दौरान वो ग्रामीण इलाकों में पंहुचे. जहां से उन्होंने ये सोचा कि उन्हें आगे बढ़कर युवाओं के लिए कुछ अलग करना है. एक नया रास्ता अख्तियार करना है.
प्रियंक कहते हैं-

नुक्कड़ एक आम सी जगह हो जहाँ लोग आएं, चाय पिए और चले जाएं, मैं ऐसा नहीं चाहता हूं. मैं चाहता था कि लोगों को यहाँ एक अनुभव हो, और लोग नई-नई चीजें यहाँ से सीखें.

(सोर्स-THE BETTER INDIA )

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