गजब सलाम: तालाब में डूबती जिंदगियों के रक्षक हैं गोताखोर जगदीश खरे

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महाराष्ट्र के नागपुर का गांधीसागर तालाब खुदकुशी के लिए बेहद बदनाम है. जिंदगी से हारे लोग यहां खुदकुशी करने आते हैं, और यहां होश में होता है वो शख्स जो करीब 23 सालों से ऐसे ही लोगों को बचाता आ रहा है. सिर्फ इतना ही नहीं नागपुर में कुल 7 तालाब हैं कहीं कोई खुदकुशी के लिए कूदता है तो गोताखोर जगदीश खरे को ही जान बचाने के लिए बुलाया जाता है. आइए जानते हैं जगदीश खरे की पूरी कहानी-

(फोटो- फेसबुक)

करीब 1 हजार जिंदगियां बचा चुके हैं जगदीश खरे

शुरुआत में जगदीश इस काम के लिए पेशेवर नहीं थे. साल 1994 से उन्होंने गांधीसागर तालाब में ही कूदकर जगदीश के दोस्त ने जान दे दी थी. इसके बाद से ही खरे ने लोगों को खुदकुशी से बचाने का जिम्मा उठा लिया. तकरीबन 23 सालों से ये काम बदस्तूर जारी है.

इन 23 साल में तकरीबन 1 हजार लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं. वहीं 2 हजार से ज्यादा शवों को तालाब से बाहर निकाल चुके हैं. सबसे खास बात ये है कि वो इस काम के पैसे नहीं लेते हैं.

लिम्का बुक रिकॉर्डधारी हैं जगदीश

करीब 1 हजार जान और 2 हजारों शवों को बाहर निकालने वाले जगदीश खरे का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है. साल 2013 में उन्होंने ये सम्मान हासिल किया. साल 2016 में उन्हें एक बेहद प्रतिष्ठित निजी चैनल की तरफ से अभिनेता अक्षय कुमार ने सम्मानित किया था.

हर दिन नई जिंदगी बचाने की तलाश में रहते हैं

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जगदीश गांधीसागर औऱ आसपास के तालाबों के आसपास ही पूरे दिन रहते हैं. जैसे ही उन्हें कोई तालाब में कूदता नजर आता है वो खुद भी छलांग लगा देते हैं इस दौरान वो अपने जान की परवाह बिल्कुल भी नहीं करते हैं. कभी-कभी तो ऐसा होता है कि जान बचने के बाद खुदकुशी की कोशिश करने वाला शख्स जगदीश पर ही चढ़ बैठता है कि आखिर क्यों बचा ली मेरी जान? लेकिन जगदीश को इन बातों का कोई भी फर्क नहीं पढ़ता.

पत्नी देती हैं पूरा साथ

इस नेक काम में जगदीश खरे की पत्नी जयश्री भी उनका पूरा साथ देती हैं. उन्हें इस बात का मलाल नहीं है कि उनके पति थोड़ा पैसा कम ही कमाते हैं उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके बहादुर पति ने हजारों लोगों की जान बचाई है.

रिश्तेदारों के बीच अपमानित होना पड़ता है

समाज की विडंबना देखिए ऐसा शख्स जिसे सिर आांखों पर बिठाना चाहिए, उसकी अपने ही समाज में कद्र नहीं है. उसे लाश उठाने वाले कहा जाता है, मीडिया रिपोर्ट्स में छपी खबर के मुताबिक जगदीश की पत्नी को इस बात की चिंता रहती है कभी-कभी उनके रिश्तेदार भी उनके साथ खाने या उठने बैठने में कतराने लगते हैं

जगदीश खरे की अदम्य बहादुरी और दूसरों के लिए जीने का उनका जज्बा उन्हें दूसरों से काफी अलग और श्रेष्ठ बनाता है. गजब इंडिया का जगदीश को सलाम.

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