कैराना

फूलपुर-गोरखपुर के बाद कैराना से बीजेपी को बड़ा सबक, 2019 में ऐसे हो सकती है हालत खराब

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एकजुट विपक्ष के नतीजे दिखने शुरू हो गए हैं. पहले गोरखपुर-फूलपुर और अब कैराना-नूरपुर में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं. एक ऐसी सीट कैराना जिसपर बीजेपी के कद्दावर नेता हुकुम सिंह का राज था, उनकी बेटी मृगांका सिंह का दबदबा नहीं दिख सका. दूसरी तरफ आरएलडी के जाट-मुस्लिम समीकरण और एसपी-कांग्रेस के समर्थन के दमपर तबस्सुम हसन ने अपना पलड़ा भारी कर लिया. ये सिर्फ एक सीट कैराना के नतीजे नहीं है, ये संकेत है 2019 के आम चुनाव के लिए. देशभर के विपक्ष के लिए कैराना एक पायलट प्रोजेक्ट जैसा था. नूरपुर विधानसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी के नईमुल हसन ने जीत दर्ज की है.

फोटो- नवजीवन

कैराना के बाद अब बीजेपी की मुश्किलें बढ़ेंगी

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक साथ आ जाए तो क्या हो सकता है, इसका नतीजा फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव के नतीजों में देखा गया. अब कैराना-नूरपुर में विपक्ष के एकजुट होने के बाद बीजेपी को आसानी से पीछे छोड़ दिया गया.

फोटो- ट्विटर

ऐसे में देशभर के विपक्ष के लिए ये नसीहत और उदाहरण है कि अपने छोटे-छोटे विवादों को भूलकर एक साथ आने पर ही बीजेपी को टक्कर दी जा सकती है. 2019 चुनाव में अगर ऐसा हुआ यानी एकजुट विपक्ष बीजेपी के सामने लड़ा तो पार्टी को बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. हाल ही में एक टीवी चैनल के सर्वे में इसकी बानगी देखने को मिली. यूपी में बीजेपी की सीटें इकाई में भी हो सकती हैं.

मुस्लिम-जाट-दलित समीकरण से बनेगी बात

फोटो- आजतक

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम-जाट-दलित जिसके साथ आ जाए उसकी बल्ले-बल्ले हो जाती है. 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ जाट और दलित वोटरों का बड़ा तबका था. लेकिन अब 21 फीसदी वाला दलित समुदाय बीजेपी से खासा नाराज है और फिलहाल बीएसपी के पाले में दिखता है, वहीं 19 फीसदी आबादी वाला मुस्लिम समुदाय एसपी, बीएसपी, कांग्रेस में बंटा हुआ था, एकजुट विपक्ष के केस में ऐसा नहीं होगा. पश्चिम यूपी का जाट समुदाय भी बीजेपी से नाराज है. ऐसे में मुस्लिम-जाट-दलित समीकरण कामयाब हुआ तो यूपी में तो बीजेपी को कोई नहीं बचा सकता.

((ये आर्टिकल पहले Centre Women पर पब्लिश हुआ था))

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