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जानिए RSS संस्थापक डॉ हेडगेवार के बारे में जिन्हें प्रणब मुखर्जी ने बताया भारत मां का महान सपूत

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7 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में शामिल हुए देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी. अपने भाषण से पहले मुखर्जी ने RSS के संस्थापक डॉ हेडगेवार की जन्मस्थली का दौरा किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने विजिटर बुक में लिखा,

मैं यहां भारत मां के महान सपूत डॉ केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि देने आया हूं.

RSS के संस्थापक की इस तारीफ में आखिर खास क्या?

भारत मां के महान सपूत बताने वाली हेडलाइन अमूमन हर टीवी चैनल पर ब्रेकिंग और अखबार में सुर्खियों की तरह छपी हुई है. आखिर इस पंक्ति में ऐसा क्या है? जवाब है राजनीति और विचारधारा के तौर पर बंटे हुए कांग्रेस और संघ के नेताओं ने एक दूसरे की तारीफ कम ही की है. ऐसे में जीवनभर कांग्रेस के नेता रहे प्रणब मुखर्जी ने जब संघ के संस्थापक को भारत माता का महान सपूत बताया तो लोगों ने खास ध्यान दिया.

ऐसे में जानते हैं डॉ हेडगेवार के बारे में कुछ खास बातें

डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार की खासियत है उनका अभावों में पैदा होने से लेकर शीर्ष पर पहुंचने तक का सफर. 1 अप्रैल 1889 को नागपुर के ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए हेडगवार के माता-पिता की मौत प्लेग से हो गई थी. उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 13 साल थी.

डाक्टरी से RSS की दुनिया

12वीं की पढ़ाई पुणे से पूरी करने के बाद हेडगवार ने 1914 में डॉक्टर की ट्रेनिंग ली, 1915 में वो डॉक्टर बनकर नागपुर लौटे. 27 सितंबर 1925 को उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना की थी.

बचपन से ही बागी तेवर

जब हेडगेवार पुणे में हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहे थे तो वंदेमातरम गाने की वजह से उन्हें निकाल दिया गया था क्योंकि ऐसा करना ब्रिटिश सरकार के सर्कुलर का उल्लंघन था.

मैट्रिक के बाद वो 1910 में मेडिकल की पढ़ाई के लिए कलकत्ता गए. साल 1915 में वो डॉक्टर के रूप में नागपुर लौट आए. लेकिन डॉक्टर बनकर पैसा कमाना उनका उद्देश्य नहीं था ऐसे में वो आजादी के आंदोलन से जुड़ गए.

सरकार पर सीधा हमला नहीं

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ आलोचकों का मानना है कि 1925 में संघ की नींव रखने के बाद डॉ हेडगेवार ने उसे ब्रिटिश विरोधी आंदोलनों से दूर रखने का निर्णय किया था. 21 जून, 1940 में डॉ हेडगेवार का निधन हो गया.

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