प्रणब मुखर्जी आखिर RSS के समारोह में आ ही गए, इस बहस की जड़ और इतिहास समझिए

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तमाम विवादों, अटकलों और बहस के बीच आखिर वो दिन आ ही गया. जब देश के पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के बड़े नेता रहे प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में शिरकत करने जा रहे हैं. माहौल बना हुआ है. बीजेपी खुश मगर आशंकित है, वहीं कांग्रेस को समझ नहीं आ रहा कि आखिर होने क्या जा रहा है. खुद प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने उन्हें नसीहत दे दी है कि आरएसएस जैसे संगठन से बचकर रहने में ही भलाई है. शर्मिष्ठा ने कहा कि आपकी यानी प्रणब मुखर्जी के फेक बयानों के साथ कभी भी तस्वीर वायरल हो सकती है.
प्रणब मुखर्जी
फोटो- ट्विटर

प्रणब मुखर्जी आखिर चाहते क्या हैं?

जब से देश में बीजेपी की सरकार आई है प्रणब मुखर्जी भी बदले बदले से नजर आ रहे हैं. कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे प्रणब कभी पीएम मोदी की जमकर तारीफ करते नजर आए तो कभी उनकी नीतियों के कसीदे पढ़ते नजर आए. कई फैसलों में जब कांग्रेस पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ रही, प्रणब बिलकुल शांत नजर आए. ऐसे में वो आज क्या बोलेंग ये बेहद अहम होगा, सिर्फ आज के लिए नहीं, 2019 के चुनाव के लिए भी उसके मायने निकाले जाएंगे
फोटो- Wion

आखिर RSS का क्या योगदान है, क्या विवाद है?

आखिर आरएसएस जो देश में कोई प्रतिबंधित संगठन नहीं है उसके समारोह में प्रणब मुखर्जी के शामिल होने पर विवाद क्यों मचा है. इस बात को समझने के लिए आपको आरएसएस के योगदान और विवाद को जान लेना चाहिए.

संघ का योगदान

  • आरएसएस की आलोचना आजादी के बाद से ही होती आई है. लेकिन कई युद्धों, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में इस संगठन ने बिना किसी जाति, धर्म को देखे हुए कई अच्छे काम किए हैं-
  • स्वंयसेवकों ने अक्टूबर 1947 से कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखी. ऐसे समय में जब सरकार और कश्मीर के राज हरिसिंह नहीं कर पाए थे. शरणार्थियों को राहत शिविर तक पहुंचाने और मदद करने में भी संघ सबसे आगे रहा था.
  • 1962 में चीन से युद्ध के दौरान सैनिक आवाजाही मार्गों की चौकसी, प्रशासन की मदद, और खाना रसद आपूर्ति में संघ का बड़ा योगदान रहा. जिसके बाद साल 1963 में गणतंत्र दिवस के परेड में तात्कालीन नेहरु सरकार ने आरएसएस को भी आमंत्रित किया था. यहीं नहीं 1965 के युद्ध में भी रक्तदान और तमाम दूसरे काम में आरएसएस आगे रहा.
  • आपातकाल के समय आरएसएस ने भूमिगत रह कर आंदोलन शुरू किया था. सड़कों पर पोस्टर चिपकाकर, लोगों को सूचनाए देकर वो देश को जागृत करते रहे.
  • प्राकृतिक आपदाओं जैसे ओडिशा में चक्रवात, कश्मीर बाढ़ के समय संघ के कार्यकर्ताओं ने खुद जाकर लोगों की मदद की थी. भोपाल गैस त्रासदी के दौरान भी संघ के लोग आगे रहे थे.

विवादों से रहा है नाता

  • महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का नाम संघ से जुड़ता रहा है. इसके बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने संघ पर बैन लगा दिया था. लेकिन बाद साल 1949 ये बैन हटा लिया गया है.
  • ऐस कहते हैं कि कि संघ पर हमेशा से सवर्ण हिंदुओं का ही एकाधिकार रहा है, दूसरी छोटी जातियों के लोगों को उस समान अधिकार नहीं दिया जाता है.
  • देश की आजादी में संघ का क्या योगदान है इस पर सवाल उठते आए हैं.

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