PM मोदी हिमालय क्यों गए थे? मोदी की जिंदगी की 10 खास घटनाओं का पूरा ब्योरा

PERSONALITIES

17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में पैदा हुए PM मोदी दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक हैं. आज सिर्फ देश में ही नहीं दुनिया के कई देशों में उनके नाम का डंका बजता है. लेकिन ये जानकर हैरानी होती है कि ऐसा प्रभावशाली शख्स एक समय सबकुछ छो़ड़कर हिमालय जाना चाहता था.

PM मोदी के जीवन की 10 सबसे खास घटनाएं

नरेंद्र मोदी

1. 18 साल की उम्र में छो़ड़ दिया था घर

बचपन से ही तेज और कुशाग्र बुद्धि के नरेंद्र मोदी का मन साधु संतों के प्रवचन के तरफ जाने लगा था. ऐसे में अध्यात्म की तलाश में वो 18 साल की उम्र में हिमालय पर चले गए थे.

सांसरिक चीजों से उनका मनभर गया था. इसी वजह से उनकी मां हीराबेन ने छोटी उम्र में ही उनकी शादी जशोदाबेन से करा दी थी. ये शादी भी नरेंद्र मोदी को रोक नहीं पाई और वो काफी दिनों तक हिमालय की वादियों में साधुओं के साथ रहे.

2. राजनीतिशास्त्र में एमए फिर आरएसएस से नाता

PM मोदी ने राजनीतिशास्त्र में पोस्टग्रेजुएशन किया. इससे पहले से ही वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ चुके थे. साल 1967 में उन्होंने सदस्यता हासिल कर ली थी. साल 1974 में वो नव निर्माण आंदोलन से भी जुड़े और जब तक बीजेपी में शामिल नहीं हुए थे तब तक बतौर फुलटाइम कार्यकर्ता संघ से जुड़े रहे.

3. 1980 में बीजेपी में शामिल, फिर महासचिव बने

आडवाणी के साथ नरेंद्र मोदी

साल 1980 में उनको संघ की तरफ से बीजेपी में भेजा गया. महज 8 सालों में उन्हें गुजरात का बीजेपी महासचिव बना दिया गया. रूतबा ऐसा कि पुराने दिग्गज भी उनके सामने अब ‘बौने’ दिखने लगे थे. महासचिव बनने के सिर्फ 2 साल बाद ही उन्होंने उस समय के बीजेपी के सबसे कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ-अयोध्या यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने लगे.

4. 2001 में बड़े ही स्टाइल से बने मुख्यमंत्री

साल 2001 गुजरात के लिए त्रासदी का साल था. गुजरात में भूकंप आया और करीब 29 हजार लोगों की मौत हो गई. चारों तरफ मचे हाहाकार का दबाव उस समय के सीएम केशुभाई पटेल पर भी पड़ा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. फिर नरेंद्र मोदी को राज्य का सीएम बनाया गया. तब से लेकर आजतक वो या तो सीएम रहे या तो पीएम.

5. मुसीबत का दौर साल 2002

अभी नरेंद्र मोदी को सत्ता संभाले कुछ ही महीने हुए थे कि गोधरा कांड हो गया. ऐसे में गुजरात में दंगे भड़क उठे. इन दंगों का आरोप नरेंद्र मोदी पर भी लगा. दोनों समुदाय के सैकड़ों लोगों की जानें चली गई. PM मोदी पर इस्तीफे का दबाव बढ़ने लगा लेकिन वो अपनी कुर्सी बचाए रखने में कामयाब रहे.

6. दुनियाभर से लगे प्रतिबंध

हालात ये हो गए थे कि पार्टी स्तर पर भी उनका विरोध होने लगा लेकिन लालकृष्ण आडवाणी खेमा उनके समर्थन में रहा. अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने नरेंद्र मोदी को वीजा देने से इनकार का ऐलान कर दिया था. अब आज का दिन भी आपके सामने हैं जब अमेरिका और ब्रिटेन में पीएम मोदी का जलवा है.

7. लगातार 4 बार सीएम रहे

इन आरोपों का पीएम मोदी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा साल 2002 के चुनावों में भारी बहुमत से वो जीते. इसके बाद 2007 और 2012 में भी उनकी सरकार बनी. ऐसे में मोदी कुल चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहे जब तक वो देश के प्रधानमंत्री नहीं बन गए.

8. साल 2013 में पीएम पद के उम्मीदवार चुने गए

देशभर में अपार लोकप्रियता को बीजेपी ने महसूस किया और नरेंद्र मोदी को साल 2013 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया. ऐलान के बाद ही पीएम इन वेटिंग कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी नाराज हो गए, बात पार्टी छोड़ने तक पहुंच गई. इतना ही नहीं एनडीए के अंदर से भी फूट की आवाजें आने लगीं और नीतीश कुमार ने गठबंधन तोड़ दिया.

9. 26 मई 2014 को बने देश के प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा और 282 सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता हासिल की. सारे विरोधियों के मुंह बंद हो गए. PM मोदी ने एक सांसद के तौर पर यूपी के बनारस और गुजरात के वडोदरा दोनों जगहों से भारी जीत दर्ज की.

10. प्रधानमंत्री के तौर पर अव्वल हैं PM मोदी

फिलहाल, मोदी देश के पीएम हैं, उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान जैसे बड़े फैसले और अभियान शुरू किए हैं. इनमें से कुछ का विरोध भी हुआ है और अपार जनसमर्थन भी मिला है. एक बात और साफ है कि दुनिया के कई देशों में जहां पहले भारत की आवाज तक नहीं सुनी जाती थी मोदी के पीएम बनने के बाद वहां भारत की धमक है.

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