Toilet

गजब FACTS: हड़प्पा सभ्यता के समय हर घर में था शौचालय, देश में शौचालय का इतिहास और वर्तमान

FACTS

Toilet ऐसी चीज है जिस पर बात करने से हम शर्माते हैं. लेकिन इस शर्म को दूर करने के लिए अक्षय कुमार अपनी नई फिल्म लेकर आए हैं. फिल्म में शौचालय के उपयोग और इसके फायदे से जुड़ा हुआ संदेश दिखता नजर आ रहा है. ऐसे में आज हम भी आपको टॉयलेट से जुड़ी कुछ रोचक बात बताने जा रहे हैं.

Toilet शब्द का मतलब क्या है?

द क्विंट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक टॉयलेट शब्द फ्रेंच भाषा के Toilette शब्द से बना है, जिसका मतलब होता है कपड़ा या रेपर. शुरुआत में इस शब्द का इस्तेमाल एक ऐसे कपड़े के लिए किया जाता था, जो ऊपर से ओढ़ा जा सके. बाद में इसका इस्तेमाल ड्रेसिंग टेबल को कवर करने वाले कपड़े के तौर पर किया जाने लगा. फिर ये शब्द शौचालय के लिए चलन में आया.

देश में ‘टॉयलेट’ की शुरुआत कैसे हुई?

भारत में हड़प्पा सभ्यता के समय से ही टॉयलेट का इस्तेमाल लोग करते थे. 2500 BC पहले हम इतने जागरूक थे, लेकिन सभ्यता के समाप्त होने के बाद से इनका इस्तेमाल बंद हुआ. दिल्ली स्थित सुलभ इंटरनेशनल म्यूजियम में हड़प्पा सभ्यता के नगर, लोथल में पानी से संचालित होने वाला Toilet रखा हुआ है.
ईंट और चिकनी मिट्टी से बने इन टायलेट में मेनहोल और चैंबर हुआ करता था, जहां जाकर मल इकठ्ठा होता था.

हड़प्पा सभ्यता

लेकिन इस सभ्यता के खत्म होने के बाद से ही टॉयलेट की ये शैली भी खत्म हो गई. भारत में व्यवस्थित शौचालय का निर्माण सबसे पहले मुगल बादशाहों ने सन 1556 में करवाना शुरू किया. लेकिन ये टॉयलेट सिर्फ अमीरों के लिए ही हुआ करते थे. मुगलकाल में ही कुछ जगहों पर पब्लिक टॉयलेट की पहल भी शुरू की गई, लेकिन वो सफल नहीं हो सकी.

1909 तक भारत के ट्रेनों में नहीं थे शौचालय

साल 1909 तक भारत के ट्रेनों में टॉयलेट्स नहीं हुआ करता था. यात्री गाड़ी रुकने के दौरान ही खुले में शौच के लिए जाया करते थे. ऐसे में कई बार ट्रेन भी छूट जाया करती थी.
एक बार पश्चिम बंगाल से ओखिल चंद्र सेन नाम के एक शख्स सफर कर रहा थे. वो शौच के लिए बाहर निकले और गार्ड की सीटी सुनने के बाद खुद को संभाल नहीं सके और गिर पड़े.
ओखिल ने चिट्ठी लिखकर इस बात की सूचना रेलवे ऑफिस को दी. मजेदार तरीके से लिखी गई इस चिट्ठी में टॉयलेट न होने के कारण परेशानियों का जिक्र था. इसके बाद से ही ट्रेन में टॉयलेट की सुविधा दी जाने लगी. ये चिट्ठी अब भी रेलवे म्यूजियम दिल्ली में रखी गई है.

अब भी बेहतर नहीं हैं हालात

इतनी प्राचीन सभ्यता होने के बावजूद Toilet के मामले में आज भी हम सबसे पिछड़े ही हुए हैं. भारत सरकार की स्वच्छता स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक:

1.देश के ग्रामीण इलाकों के अब भी 52.1 फीसदी लोग खुले में शौच करते हैं.

2.झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं.
3.शहरी क्षेत्रों में भी करीब 7.5 फीसदी लोग खुले में शौच करते हैं.
4.ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच करने वाले 55.4 फीसदी परिवार हैं. शहरी क्षेत्रों में ये आंकड़ा 8.9 फीसदी का है.
5. देश में 42.5 फीसदी ग्रामीण घरों में 87.9 फीसदी शहरी घरों के टॉयलेट में ही पानी की सुविधा है.

(सोर्स: द क्विंट)

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