रघुराम राजन

नजरिया:बैंकों के ख़राब लोन को लेकर पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन से निराश होने की ये है वजह

OPINION

RBI के पूर्व गवर्नर और शिकागो यूनिवर्सिटी में इकनॉमी के प्रोफेसर रघुराम राजन किसी लोकल टाइप क्लर्क से ज्यादा नहीं निकले. ऐसा हम क्यों कह रहे हैं? हाल ही में राजन ने संसदीय समिति को लिखी अपनी चिट्ठी में बताया है कि किस तरह बैंकों पर एनपीए का बोझ बढ़ता गया, जिसके लिए उन्होंने पहले ही सरकारों को आगाह किया था. लेकिन अब जब नोटबंदी के आंकड़ें निराश कर रहे हैं. 99.3 फीसदी नोट वापस आ गया है रघुराम राजन का ऐसे बोलना क्या कहलाता है.

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गजब इंडिया के लॉजिकल जर्नलिस्ट का नजरिया है कि रघुराम राजन भी वैसे ही निकले जैसे Typically सरकारी अफ़सर होते हैं.. स्टैंड ना लेने वाले और डरपोक. घटना हो जाने और रिटायरमेंट के बाद पीठ ठोकने वाले कि हमने तो पहले ही कहा था.

  • राजन तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे वो किसी पद पर नहीं बल्कि टूरिस्ट के तौर पर भारत आए रहे हों और उन्हें अखबार पढ़कर अंदाज हुआ तो उन्होंने मनमोहन और मोदी के पीएमओ को चेतावनी युक्त सलाह वाली चिट्ठी लिखी और चादर तान कर सो गए.
  • रघुराज राजन जी आप रिज़र्व बैंक के गवर्नर थे, चाहते तो हायतौबा मचा सकते थे, रोज प्रेस कॉन्फ्रेस करते सरकार को घुटनों पर ला देते. क्या मनमोहन और क्या मोदी कोई भी इस मामले में अनदेखी नहीं कर सकता था.और आपने अगर ऐसा किया होता तो आज आप महानता की श्रेणी में आते.
  • आपके जैसी चेतावनी से 10 गुना बड़ी चेतावनी मैं फेसबुक में रोज देता हूँ, अखबार भी 70 सालों से आपके मुकाबले कम से कम 5 गुना बड़ी चेतावनी सरकारों को रोज देते आ रहे हैं, पर मैं या वो आरबीआई गवर्नर तो हैं नहीं इसलिए सरकार सुनती नहीं .
  • अमेरिका में सुरक्षित 10 से 5 की नौकरी दोबारा ज्वाइन करने के बाद आप चिट्ठी लिखकर बता रहे हैं कि मैंने बता दिया था! अरे आपको लगा नहीं कि उसी समय एक पीसी करके मनमोहन सरकार को लताड़ देते या मोदी सरकार को फटकार देते. लेकिन तब शायद आप के मन में दूसरी टर्म की आस रही होगी जिसने आपको साहसी और बहादुर नहीं होने दिया.
  • तो आप अब क्यों कागजी बहादुर बन रहे हैं आप मौज करिए. शिकागो जाइए, नियाग्रा फॉल में फोटो खिंचवाइए लेक्चर दीजिए.
  • बहुत बहुत निराश किया राजन आपने. तुम भी रोटी दाल के चक्कर में फंसे आम आदमी ही निकले.

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