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गजब इंडियन: सुपर 30 के 26 छात्र IIT में चयनित, जानिए संस्थापक आनंद कुमार के संघर्ष की पूरी कहानी

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शानदार, जबरदस्त, जिंदाबाद ! ये तीन शब्द Super 30 कोचिंग इंस्टीट्यूट के संस्थापक आनंद कुमार पर बिल्कुल सटीक बैठते हैं. संघर्ष और अपनी हिम्मत के बलबूते आनंद ने न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली साथ ही कई गरीब बच्चों को बुलंदी तक पहुंचाया. आनंद के Super 30 इंस्टीट्यूट के 26 बच्चों ने इस साल भी IIT की प्रवेश परीक्षा पास कर ली है. इनमें दो मजदूर के बेटे और एक सेल्समैन का बेटा भी शामिल है. छात्रों की सफलता से उत्साहित आनंद कुमार ने कहा कि अगले साल सुपर 30 का आकार बढ़ाया जाएगा और इसमें 90 छात्रों को कोचिंग दी जाएगी. जल्द ही इसके लिए देशभर में एक टेस्ट लिया जाएगा. वेबसाइट पर इससे जुड़ी जानकारी अपलोड की जाएगी। जानते हैं इस शानदार शख्स की गजब कहानी-

Super 30
आनंद कुमार

 

हिंदी मीडियम-इंग्लिश मीडियम कुछ नहीं होता

बिहार के पटना के रहने वाले आनंद के पिता डाक विभाग में क्लरप्क थे. परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण उन्होंने गांव के ही हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा हासिल की. आनंद कुमार को बचपन से ही मैथ्स से बेहद लगाव था. ऐसे में आनंद से खुदसे मैथ्स के नए-नए फॉर्मूले बनाने भी शुरु कर दिए थे.

Cambridge University से आया बुलावा, जा न सके

आनंद को बाद में ग्रेजुएशन में पटना यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल गया. फिर आनंद के कई रिसर्च पेपर्स इंटरनेशनल जर्नल्स में भी छपने लगे. पटना यूनिवर्सिटी में किताबों का अच्छा संग्रह न होने के कारण शनिवार को आनंद बीएचयू चले जाया करते थे और वहां की लाइब्रेरी में पढ़ाई किया करते थे फिर सोमवार को वापस आ जाया करते थे. इसी बीच साल 1994 में आनंद को इंग्लैंड की मशहूर Cambridge University से पढ़ने के लिए बुलावा आया. लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वो न जा सके. इसी बीच उनके पिता का देहांत भी हो गया.

पापड़ बेचा, कोचिंग चलाया

पिता का देहांत होने के बाद आनंद के ही कंधे पर परिवार का बोझ भी आ गया. इसी बीच उन्होंने रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स नाम का एक क्लब खोल लिया था. यहां पर आनंद अपने प्रोफेसर्स की मदद से मैथ के छात्रों को ट्रेनिंग दिया करते थे, शुरुआत में वो इससे कोई पैसा नहीं लिया करते थे ऐसे में घर का खर्च चलाने के लिए उनकी मां जयंती देवी पापड़ बनाया करती थी और ये पापड़ बेचा करते थे.

कैसे बना Super 30

Super 30 आनंद के ही दिमाग की बेहतरीन उपज है. आनंद अब रामानुजम ने स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना शुरू कर दिया था. 2 बच्चे से कोचिंग में 500 तक बच्चे आने शुरु हो गए थे. एक दिन अभिषेक नाम के एक गरीब बच्चे ने आनंद से कहा- कि सर हम गरीब हैं, अगर हमारे पास फीस नहीं है तो हम कैसे देश के अच्छे कॉलेजों में पढ़ सकते हैं.

16 साल में ‘सुपर 30’ के 450 से ज्यादा छात्रों का चयन हुआ

आनंद को ये बात चुभ गई, उनका अपना गम भी ताजा हो गया. फिर उन्होंने साल 2002 में Super 30 की स्थापना की जिसमें हर साल 30 बच्चों का परीक्षा के जरिए चयन किया जाता था और रहने खाने किताबों की फ्री सुविधा दी जाती थी. जिससे IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की परीक्षा वो पास कर सके. 16 साल में ‘सुपर 30’ के 450 से ज्यादा छात्रों का चयन हुआ

दुनिया के कई अवॉर्ड्स से सम्मानित

आनंद कुमार को सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में प्रसिद्धि हासिल है. Discovery channelने तो आनंद के सुपर-30 पर 1 घंटे का शो टेलिकास्ट किया था.
हावर्ड, स्टेनफोर्ड, कोलंबिया जैसी दुनिया की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटीज में आनंद बतौर लेक्चरर जा चुके हैं. कई डॉक्यूमेंट्रीज बन चुकी है. साथ ही उनकी जिंदगी पर एक नई फिल्म बनने की तैयारी में हैं खबरें हैं कि इस फिल्म में आनंद कुमार की भूमिका रितिक रोशन निभा सकते हैं.

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