‘बदलूराम का बदन’ गाना सेना के जवान बदलूराम के त्याग की कहानी है, गाने का इतिहास जानकर गर्व होगा

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इंडियन आर्मी की बात ही कुछ और है. आपने अदम्य साहस और देशभक्ति के कई किस्से सुने होंगे. लेकिन ये ऐसा किस्सा है जिसमें एक जवान ने शहीद होकर कई सैनिकों की जान बचा ली है. आज उस वीर सैनिक पर बना ये गाना ‘बदलूराम का बदन’ असम रेजिमेंट का मार्चिंग सॉन्ग है. जानते हैं सबकुछ पहले देखिए ये वीडियो:

कौन हैं बदलूराम ?

बदलूराम ब्रिटिश भारत में इंडियन आर्मी के जवान थे, उनका रेजिमेंट अब असम रेजिमेंट का हिस्सा है. असम रेजिमेंट को इस बात का गर्व है और हर जवान आज भी इस गाने के जरिए उनके शहादत को याद करता है. साल 1939 में सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान बदलूराम ने लड़ाई लड़ी थी.

बता दें कि 1944 में ‘कोहिमा की लड़ाई’ में भारत जापान के खिलाफ लड़ा था और उस दौरान भारतीय सेना का इस वीर जवान को शहादत हासिल हुई थी.

क्या है उनसे जुड़ा किस्सा?

बदलूराम के शहीद होने के बाद तक जो खाना उनके लिए आता था उसे मंगाया जाता रहा. खाना-पीना देखने वाला मैनेजर उनके नाम से राशन लेते रहे. ये प्रक्रिया कई महीनों तक चलता रहा ऐसे में उनके नाम पर काफी राशन इकट्ठा हो गया था.

जब जापान की सेना ने इस रेजीमेंट को घेर लिया तो फिर सबके लिए राशन आना बंद हो गया, और तब बदलूराम के राशन का रखा गया स्टॉक इस रेजीमेंट के सैनिकों के काम आया और कई जवानों की भूख से जान नहीं गई. गाने के बोल आप खुद समझ सकते हैं- ‘बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है….’

आखिर ऐसा क्या कर दिया?

ऐसा हो सकता है कि हम लोगों में से कई को ऐसा लगे कि ये बहुत बड़ी बात नहीं है, लेकिन जो जवान कठिन परिस्थितियों में जंग लड़ रहा होता है उसके लिए एक-एक रोटी मायने रखती है. ऐसे में ये रेजिमेंट भी शहादत भूल नहीं सका. हर साल बदलूराम की शहादत की याद में एक कार्यक्रम रखा जाता है, सारे युवा सैनिक इस गाने पर थिरकते नजर आते हैं. बता दें कि ये गाना 1946 में मेजर एम.टी प्रॉक्टर ने कंपोज किया था.

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