सीबीआई

सीबीआई के नए अंतरिम डायरेक्टर और एजेंसी के पूरे इतिहास के बारे में जानिए

FACTS

सीबीआई में चल रहे उठापटक के बाद अब ओडिशा कैडर के आईपीएस ऑफिसर एम नागेश्वर को सीबीआई का अंतरिम डायरेक्टर बनाया गया है. वहीं सीबीआई के नंबर 1 और नंबर 2 अधिकारी CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजा दिया गया है. आलोक वर्मा छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए हैं. आपको पता होगा की आलोक वर्मा और अस्थाना एक दूसरे पर घूस लेने के आरोप लगा रहे हैं और विवाद सार्वजनिक हो गया है.

फोटो- जी मीडिया

सीबीआई के नए अंतरिम डायरेक्टर नागेश्वर राव

फोटो-Savukku

उस्मानिया यूनिवर्सिटी के अलुमनी नागेश्वर राव साल 1986 बैच के ऑफिसर हैं. वो फिलहाल ओडिशा पुलिस में एडिशनल डायरेक्टर जनरल के पद पर तैनात थे. शारदा घोटाले की जांच नागेश्वर राव ही कर रहे हैं. अप्रैल,2016 में उन्हें 5 साल के लिए सीबीआई का ज्वाइंट डायरेक्टर भी बनाया गया था.

सीबीआई का इतिहास

  • सीबीआई यानी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन की स्थापना साल 1941 में बनाए गए स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) से जुड़ी है.
  • SPE का काम उस वक्त सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान युद्ध के लिए किए जा रहे ट्रांजेक्शन और सप्लाई में घूस या भ्रष्टाचार के केस की जांच करना था.
  • साल 1946 में दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू कियाय. इस एक्ट द्वारा द्वारा एसपीई का अधीक्षण गृह विभाग को हस्तांतरित किया गया और भारत सरकार के सभी विभागों को इसके दायरे में लाया गया.
  • इसी एजेंसी को साल 1 अप्रैल 1963 में CBI का नाम दिया गया. इस वक्त सीबीआई के दायरे में केंद्र सरकार के सभी ऑफिस, पीएसयू और उनके कर्मचारियों आ गए.
  • साल 1969 में राष्ट्रीय बैंकों को भी सीबीआई के जांच के दायरे में ला दिया गया.
  • डीपी कोहली को सीबीआई का फाउंडर डायरेक्टर कहा जाता है. वो साल 1963 से लेकर 1968 तक सीबीआई के चीफ रहे. कोहली साल 1955 से लेकर 1963 तक SPE के इंस्पेक्टर जनरल भी रहे.
फोटो-सीबीआई वेबसाइट
  • कोहली के बाद एफ वी अरुल ने साल 1968 से लेकर 1971 तक इस जांच एजेंसी की कमान संभाली.
  • अस्थाना-वर्मा के बीच हुआ ये विवाद एजेंसी के इतिहास का सबसे बड़ा विवाद माना जा रहा है. ऐसे में एजेंसी को और सरकार को सीबीआई की विश्वनीयता बचाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे.

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