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CBI के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई, हर किरदार और विवाद समझिए

FACTS

CBI के इतिहास में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ. इस जांच एजेंसी के नंबर 1 और नंबर 2 अधिकारी आपस में उलझे हुए हैं और एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. अब सीबीआई ने अपने नंबर 2 अधिकारी यानी विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआऱ दर्ज कराई है, मामला 3 करोड़ रुपये के घूस का है. वहीं अस्थान ने सीबीआई के नंबर 1 अधिकारी यानी CBI के निदेशक आलोक वर्मा पर 2 करोड़ रुपये घूस लेने की शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयुक्त से की है. झूठ कौन बोल रहा है ? कौन किसे बचाना चाह रहा है? इन सबसे अलग सबसे बड़ी बात ये है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की विश्वनीयता पर पलीता लग गया है. आइए जानते हैं इस विवाद का हर एक पहलू.

फोटो- जी मीडिया

CBI के विशेष निदेशक अस्थाना पर आरोप क्या है?

राकेश अस्थाना के खिलाफ ये एफआईआर हैदराबाद के एक कारोबारी सतीश सना की शिकायत पर दर्ज हुआ है. आऱोप ये है कि सतीश ने अस्थाना को अपने खिलाफ जांच रोकने के लिए 3 करोड़ की रिश्वत दी है.

दरअसल, मांस कारोबारी मोइन कुरैशी पर भ्रष्टाचार की जांच में सतीश सना से से भी CBI ने पूछताछ की थी. इसी जांच को रोकने के एवज में सतीश 3 करोड़ घूस देने की बात कह रहा है. सतीश का दावा है कि ये पैसा मनोज प्रसाद नाम के एक शख्स के जरिए दिया गया जिसने सतीश से कहा था कि वो सीबीआई में लोगों को जानता है और जांच को रुकवा सकता है.

अस्थाना ने CBI के निदेशक पर क्या आरोप लगाए हैं?

पलटवार में अस्थाना ने एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा पर भ्रष्टाचार के कई मामले गिना दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्थाना ने वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखी है जिसमें वर्मा पर सतीश से दो करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया गया है. इसके अलावा कई दूसरे आरोप भी अस्थाना पर लगाए जा चुके हैं.

पीएम मोदी के खास बताए जाते हैं अस्थाना

राकेश अस्थाना को राहुल गांधी पीएम मोदी का खास बताते हैं. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि अस्थाना गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. मोदी सरकार में उन्हें सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाया गया. 2017 में आलोक वर्मा की बतौर CBI चीफ नियुक्ति हुई. वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर नियुक्त किए जाने का विरोध किया था.

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