भुखमरी

भुखमरी की दहलीज पार कर चुका है भारत, ये आंकड़े आपको डरा देंगे

FACTS

हैरान करने वाली बात है कि दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में भुखमरी के करोड़ों शिकार हैं. हाल ही में जारी वर्ल्ड हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 97 से फिसलकर 103 पर आ गई. दुनिया के 119 देशों वाली इस रैंकिंग में हम 103 स्थान पर हैं. समझ लीजिए कि यहां भूखमरी की क्या दशा है. इस मामले में एशियाई देशों में सिर्फ हम पाकिस्तान और अफगानिस्तान से ही थोड़े बेहतर हैं.

फोटो- सोशल मीडिया

जानते हैं भूख और भुखमरी से जुड़े कुछ खास आँकड़े

  • भारत में बच्चों में कुपोषण की स्थिति भयावह है. देश में 21% बच्चों का पूर्ण शारीरिक विकास नहीं हो पाता, इसकी बड़ी वजह कुपोषण है.
  • हंगर इंडेक्स में चीन 29वें, नेपाल 72वें, म्यामार 77 वें, इराक 78वें, श्रीलंका 84वें और उत्तर कोरिया 93वें स्थान पर है, जबकि भारत 100 वें स्थान पर फिसल गया है. यानी हमारे हालात उत्तर कोरिया से भी बुरे हैं
  • सोचने वाली बात ये है कि नेपाल-श्रीलंका जैसे देश जो भारत से मदद हासिल करते हैं. इनके बावजूद भी श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार जैसे देशों की तुलना में भुखमरी पर रोकथाम के मामले में हमारी हालत उनसे भी बदतर क्यों हो रही है?
  • भारत में भूखे लोगों की तादाद लगभग 20 करोड़ से ज्यादा है
  • FAO की एक रिपोर्ट बताती है कि रोजाना भारतीय 244 करोड़ रुपए यानी पूरे साल में करीब 89060 करोड़ रुपये का खाना बर्बाद कर देते हैं.
  • इतनी राशि से 20 करोड़ से कहीं ज्यादा पेट भरे जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए न कोई जागरूकता है न ही कोई सरकारी योजना
  • इसका मतलब यह हुआ कि भारत की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा कहीं न कहीं हर दिन भूखा सोने मजबूर है, जिससे हर वर्ष लाखों जान चली जाती है।
  • ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ के आंकड़ों को सच मानें तो रोजाना 3000 बच्चे भूख से मर जाते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि भूखे लोगों की करीब 23 फीसदी आबादी अकेले भारत में है, यानी हालात अमूमन उत्तर कोरिया जैसे ही है.

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