MeToo: अखबारों के संपादक जा रहे हैं आगे कई ‘सफेदपोश’ बेनकाब होंगे

INSPIRATION, PEOPLE

देश में एक नए तरह की क्रांति दिख रही है. जहां महिलाएं बड़े-बड़े सफेदपोशों के नकाब उतारकर उनके चेहरे की कालिख दिखा रही हैं. MeToo ने अंग्रेजी अखबारों के करीब 5 संपादक स्तर के लोगों की ‘कुर्बानी’ ले ली है.ताजा मामला टाइम्स ऑफ इंडिया हैदराबाद के संपादक केआर श्रीनिवास का है जिन्होंने 7 महिला पत्रकारों के आरोपों के बाद इस्तीफा दे दिया. संपादकों के अलावा बॉलीवुड, राजनीति से जुड़े लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं.

MeToo के फेहरिस्त में इन लोगों का भी नाम आ चुका है

फोटो-फेमिना

कभी संपादक बने बैठे और अब केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर के खिलाफ 9 लड़कियों ने मुँह खोला है. साजिद खान के वीभत्स रूप को 4 लड़कियाँ सामने ला चुकीं हैं. इससे साफ है उत्पीड़न करने वाले सीरियल अपराधी होते हैं उन्हें पकड़ना आसान है बस ऑर्गेनाइजेशन आँख कान खोलकर रखे.

  • ये उन लोगों को करारा तमाचा है जो इस अभियान पर सवाल उठा रहे थे और लड़कियों के मकसद पर संदेह कर रहे थे.
  • ये उन लोगों को भी करारा जवाब है जो कह रहे थे या कह रही थीं कि महिलाएं पुराने अपमान, बदसलूकी और उत्पीड़न को भूल जाएँ.

अफसोस किस बात का है?

अफसोस की बात है कि बहुत सी महिलाओं ही उत्पीड़न का शिकार महिलाओं का साथ देने की बजाए भारतीय संस्कृति और संस्कार के नाम पर चुप बैठने और भूल जाने को कह रही हैं.. मुझे यकीन है कि बाकी महिलाएं भी आगे आएँगी और अपने अत्याचारी को छोड़ेंगी नहीं. मीडिया मालिकों से गुजारिश है कि वो पुराने पापों पर फौरन एक्शन लें और नए अत्याचारियों को पनपने के पहले ही कुचल दें. उनका पता लगाना आसान है सबको पता होता है. चाय वाले से पूछ लें वो सबका कच्चा चिट्ठा खोल देगा. आखिर में याद रखिए जो भी नारी जाति का, करता यूं अपमान. उसका नाश अवश्य ही कर देता भगवान.

अभी तो शुरुआत हुई है?

MeToo कैंपेन में अबतक जो नाम सामने आए हैं वो तो महज शुरुआत है. अभी भी कई ऐसे दरिंदे बसे हुए हैं जिनके अत्याचारों के खिलाफ महिलाएं आवाज उठा सकती हैं. ऐसे में #Metoo की आंच हिंदी मीडिया, राजनीति से लेकर हर सेक्टर पर असर डालेगी. मुमकिन है कि बदलाव आएगा और जरूर आएगा.

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