दशहरा स्पेशल: देश के इन जगहों पर की जाती है रावण की पूजा, कारण भी हैं बेहद दिलचस्प

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देशभर में विजयादशमी का त्योहारी बुराई पर अच्छाई के जीत के तौर पर मनाया जाता है. परंपरा के मुताबिक, रावण के दस सिर वाले पुतले को दहन कर हम जश्न मनाते हैं, पर्व को दशहरा का नाम दिया जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि पूरे देश में कई ऐसी जगह हैं जहां रावण की पूजा होती है और उससे जुड़ी चीजों का जश्न मनाया जाता है.
आइए विस्तार से इन जगहों के बारे में जानते हैं और समझते हैं कि क्या हैं इनके कारण:

फोटो- ट्विटर

गढ़चिरौली में रावण की पूजा करता है ये समुदाय

महाराष्ट्र के गढचिरौली जगह पर आदिवासी समुदाय पूरे धूमधाम से रावण की पूजा करते हैं. बताया जाता है कि इस समुदाय के लिए रावण ही उनके ईष्ट देव हैं. रावण की पूजा वाले इस त्योहार को फाल्गुन नाम दिया जाता है. हम किसी की श्रद्धा को रोक नहीं सकते, ये उनकी आस्था का तरीका है जिसका सम्मान सबको करना चाहिए.

मध्यप्रदेश में दो जगहों पर होती है रावण की पूजा

मध्यप्रदेश के मंदसौर और उज्जैन जिले के एक गांव में रावण की पूजा की जाती है. दरअसल, मान्यता है कि मंदसौर का वास्तविक नाम दशपुर था जो रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था. ऐसे में रावण इस जगह का दामाद हुआ और दामाद का सम्मान तो एक रस्म रिवाज है, इसलिए यहां पुतला दहन नहीं करके रावण की पूजा की जाती है. यहां बकायदा रावण की मूर्ति भी बनी हुई है.

वहीं उज्जैन के चिखली गांव में ये मान्यता है कि अगर रावण की पूजा नहीं की गई तो गांव जलकर खत्म हो जाएगा, ऐसे में गांव के लोग पूजा करते हैं.

हिमाचल प्रदेश में की थी रावण ने शिवजी की अराधना

रावण के बारे में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में दिलचस्प मान्यता है. बताया जाता है कांगड़ा जिले में ही रावण ने भगवान शिव की उपासना की थी, जिससे खुशकर भगवान ने उन्हें वरदान दिया था. ऐसे में यहां पर रावण के पुतले को जलाने की मान्यता नहीं है.

रावण की यहां हुई थी शादी

मान्यता है कि रावण की शादी जोधपुर के मंडोर में हुई थी. यहां के गधे, श्रीमाली समाज के लोग रावण की पूजा करते हैं और ये भी कहते हैं वो रावण के वंशज हैं. इसलिए यहां पर रावण के पुतले को जलाने की प्रथा नहीं है.

गाजियाबाद के पास की ये है मान्यता

गाजियाबाद के पास बिसरख गांव में रावण का निर्माणाधीन मंदिर है. मान्यता है कि ये रावण का ननिहाल है. कहा जाता है कि बिसरख का वास्तविक नामम विश्वेशरा था, जो रावण के पिता के नाम पर पड़ा था बाद में इसे बिसरख कहा जाने लगा.

ऐसे में साफ है कि गजब इंडिया के लोगों की अपनी-अपनी मान्यताएं हैं और इन्हीं विविध मान्यताओं के साथ जिना इस देश की खासियत है.

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