स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ का विरोध कर रहे इन आदिवासियों की सुध कौन लेगा-कब लेगा?

PEOPLE, THE NATION

31 अक्टूबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण करने जा रहे हैं. सरदार वल्लभभाई पटेल की इस प्रतिमा को स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की तर्ज पर स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का नाम दिया गया है. अत्यंत भव्य और सुप्रचारित इस प्रोजेक्ट का काम साल 2014 से चल रहा था. 42 महीनों की डेडलाइन रखी गई थी, जो अब पूरी हो चुकी है. प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के अलग-अलग राज्यों में तो इस मूर्ति का जिक्र किया ही है जापा में भी इसकी तारीफ कर आए हैं. लेकिन इन सबके बीच सोचने समझने की बात ये है कि आखिर आदिवासी संगठन के लोग इस प्रोजेक्ट का विरोध क्यों कर रहे हैं.

फोटो- स्क्रॉल

‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित है

दरअसल, ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया में स्थापित है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2989 करोड़ की लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट से करीब 75 हजार आदिवासी प्रभावित हो रहे हैं. जो अब प्रतिमा के अनावरण का विरोध भी कर रहे हैं. 31 अक्टूबर को बंद भी बुलाया गया. आदिवासी नेताओं का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से उनके समुदाय के अधिकारों का हनन हो रहा है, ये विकास आदिवासी विरोधी औऱ एकतरफा है. करीब 100 संगठन इस विरोध को लेकर सहमत हैं.

22 गांवों के मुखिया का लेटर

इतना ही नहीं सरदार सरोवर डैम के पास के 22 गांव के मुखियाओं ने पीएम मोदी को खुला खत लिखा है. इसमें कहा गया है कि अगर सरदार पटेल होते तो अपनी इस मूर्ति के लिए हो रही तोड़फोड़ को देखकर रो देते. इन गांववालों का कहना है कि मूर्ति की वजह से प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचा है. वो जंगल, नदियां, झरने, खेती की जमीन जिसने सदियों से हमारी मदद की, जिसके बल पर हम जी रहे हैं, उसे ही बर्बाद कर हम खुशियां कैसे मना सकते हैं. ये गांववाले कहते हैं कि जब हम आवाज उठाते हैं तो पुलिस हमें रोकती है और आपको यानी पीएम को हमारी गुहार सुनाई नहीं पड़ती.

इस प्रोजेक्ट की भव्यता जानिए

दुनिया की ये सबसे ऊंची प्रतिमा अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से करीब 2 गुना ऊंची है, 182 मीटर उंची इस प्रतिमा को बनाने में 5700 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है. l&t कंपनी ने इसे बनाने का टेंडर हासिल किया था, 42 महीने की डेडलाइन तय की गई थी.

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