जयपुर के पास स्थित बेहद खूबसूरत आभानेरी और उसकी अनोखी विरासत की

TRAVEL

कला, संस्कृति, इतिहास एवं पर्यटन क्षेत्रों की बात की जाये, तो भारत भूमि का मुकाबला तो दूर, कोई आस-पास भी खडा हुआ नजर नहीं आता। इसी का उदाहरण है ‘आभानेरी’ जो कि आगरा रोड पर जयपुर से 95 किमी की दूरी पर स्थित है। दौसा जिले का ह्रदय कहे जाने वाले सिकंदरा कस्बे से उत्तर की ओर कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, आभानेरी गाँव। पुरातत्व विभाग को प्राप्त अवशेषों से ज्ञात जानकारी के अनुसार आभानेरी गाँव 3000 वर्ष से भी अधिक पुराना हो सकता है, इसी गाँव में स्थित है “चाँद बावडी”। आभानेरी गाँव का शुरूआती नाम “आभा नगरी” था (जिसका मतलब होता है चमकदार नगर), लेकिन कालान्तर में इसका नाम परिवर्तित कर आभानेरी कर दिया गया। यह अपने सीढ़ीदार कुओं के कारण  लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है। यहाँ स्थित चांद बावरी अपने सुन्दर विशाल सीढ़ीदार कुओं की वजह से हमेशा ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है।

Rajasthan Tourism Buzz

सम्राट मिहिर भोज द्वारा स्थापित

ऐसा माना  जाता है की आभानेरी गाँव को सम्राट मिहिर भोज द्वारा स्थापित किया गया था जो एक गुर्जर प्रतिहार राजा थे। दुनिया की सबसे गहरी यह बावडी चारों ओर से लगभग 35 मीटर चौडी है तथा इस बावडी में ऊपर से नीचे तक पक्की सीढियाँ बनी हुई हैं, जिससे पानी का स्तर चाहे कितना ही हो, आसानी से भरा जा सकता है। 13 मंजिला यह बावडी 100 फ़ीट से भी ज्यादा गहरी है, जिसमें भूलभुलैया के रूप में 3500 सीढियाँ (अनुमानित) हैं। इसके ठीक सामने प्रसिद्ध हर्षद माता का मंदिर है। बावडी निर्माण से सम्बंधित कुछ किवदंतियाँ भी प्रचलित हैं जैसे कि इस बावडी का निर्माण भूत-प्रेतों द्वारा किया गया और इसे इतना गहरा इसलिए बनाया गया कि इसमें यदि कोई वस्तु गिर भी जाये, तो उसे वापस पाना असम्भव है।

बावडी के लिए प्रसिद्द

चाँदनी रात में एकदम दूधिया सफ़ेद रंग की तरह दिखाई देने वाली यह बावडी अँधेरे-उजाले की बावडी नाम से भी प्रसिद्ध है। तीन मंजिला इस बावडी में नृत्य कक्ष व गुप्त सुरंग बनी हुई है, साथ ही इसके ऊपरी भाग में बना हुआ परवर्ती कालीन मंडप इस बावडी के काफ़ी समय तक उपयोग में लिए जाने के प्रमाण देता है। इसकी तह तक जाने के लिए 13 सोपान तथा लगभग 1300 सीढियाँ बनाई गई हैं, जो कि कला का अप्रतिम उदाहरण पेश करती हैं। शहर की चमक या आभानागरी के रूप से विख्यात इस गाँव की हालत वर्तमान में जीर्ण – शीर्ण है लेकिन फिर भी  ये गाँव हर साल दुनिया भर के लाखों पर्यटकों को बड़ी संख्या में अपनी ओर आकर्षित करता है । आभानेरी अपने बावडी के लिए प्रसिद्द है जिनका इस्तेमाल गर्मियों के दिनों में वर्षा जल संचयन के लिए किया जाता था। यहाँ जितने भी कुएं मौजूद हैं उनमें चंद बावरी अपनी सुन्दर पत्थर की वास्तुकला के लिए आने वाले पर्यटकों में सर्वाधिक लोकप्रिय है।

सबसे बड़े और गहरे कुओं में से एक

बावडी की सुरंग के बारे में भी ऐसा सुनने में आता है कि इसका उपयोग युद्ध या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों के समय राजा या सैनिकों द्वारा किया जाता था। लगभग पाँच-छह वर्ष पूर्व हुई बावडी की खुदाई एवं जीर्णोद्धार में भी एक शिलालेख मिला है जिसमें कि राजा चाँद का उल्लेख मिलता है। चाँद बावडी एवं हर्षद माता मंदिर दोनों की ही खास बात यह है कि इनके निर्माण में प्रयुक्त पत्थरों पर शानदार नक्काशी की गई है, साथ ही इनकी दीवारों पर हिंदू धर्म के सभी 33 कोटी देवी-देवताओं के चित्र भी उकेरे गये हैं। बावडी की सीढियों को आकर्षक एवं कलात्मक तरीके से बनाया गया है और यही इसकी खासियत भी है कि बावडी में नीचे उतरने वाला व्यक्ति वापस उसी सीढी से ऊपर नहीं चढ सकता।

आरम्भिक मध्यकाल के स्मारकों के लिए प्रसिद्ध

आभानेरी गुप्त युग के बाद तथा आरम्भिक मध्यकाल के स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है जिसके भग्नावशेष विदेशी आक्रमण के हमले में खण्डित होकर इधर-उधर फ़ैले हुए हैं। बताया जाता है की  यह भारत के सबसे बड़े और गहरे कुओं में से एक है। यहाँ हर्षत माता मंदिर एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है जो  मध्ययुगीन भारत के अद्भुत स्थापत्य वैभव का दावा करता है। यह मंदिर हर्षत माता को समर्पित है जो खुशी और हर्ष और उल्लास की देवी हैं ।

 

राजस्थानी लोकनृत्यों के लिए प्रसिद्ध

लोक नृत्य समेटा हुआ एक गांव आभानेरी गाँव अपने अलग अलग तरह के राजस्थानी लोकनृत्यों के लिए जाना जाता है जिनमें घूमर, कालबेलिया , भवाई जैसे नृत्य शामिल हैं । यहाँ घूमर भील जनजाति का लोकनृत्य है जबकि कालबेलिया नृत्य कालबेलिया समुदाय की महिलाओं द्वारा किया जाता है जिनका प्रमुख व्यवसाय जहरीले सांप पकड़कर उनका विष बेचना है ।

प्रसिद्द भवाई नृत्य

अगर यहाँ बात भवाई नृत्य की हो तो यहाँ के लोग इसे अम्बा माता या पृथ्वी माँ को सम्मान देने के लिए करते हैं। आभानेरी पहुंचना यह गाँव जयपुर से मात्र 95 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है इस वजह से यहाँ भारत के किसी भी कोने से  बड़ी ही आसानी के साथ पहुंचा जा सकता है। अपने गौरवशाली अतीत और रंगीन संस्कृति के कारणहमेशा से ही इस गाँव ने  दुनिया भर के  पर्यटकों को अपनी ओर  आकर्षित किया है।

कब आएं आभानेरी

आभानेरी की यात्रा करने के लिए उत्तम समय आभानेरी की यात्रा करने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है इस समय यहाँ का मौसम बड़ा ही सुखद और सहज रहता है।

 

abhaneri

Leave a Reply