Travel Time: देश भर में ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध है बेहद खूबसूरत मुदुमलाई

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मुदुमलाई को दक्षिण बारत का सबसे समृद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य National Park माना जता है और यह देश भर में ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध है। तीन राज्यों (कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल) की सीमाओं से लगा मुदुमलाई नीलगिरि के घने जंगलों में स्थित है और अपने वन्यजीव अभ्यारण्य के लिये जाना जाता है। 1940 में स्थापित, मुदुमलाई देश के विशाल पादप और जन्तु जगत की सुरक्षा और संरक्षण में सबसे महत्वपूर्ण और सौन्दर्यपूर्ण प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है।

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सबसे लोकप्रिय आकर्षण

यह वन्यजीव अभ्यारण्य इस भाग में सबसे लोकप्रिय आकर्षण है और कई लुप्तप्राय पौधों और जन्तुओं का घर जिनका मिलना आसान नहीं होता। जंगल में आपका स्वागत है। मुदुमलाई वन्यजीव अभ्यारण्य में वन विभाग द्वारा जंगल सफारी की व्यवस्था की जाती है जो वाकई अच्छी होती है। सफारी द्वारा अभ्यारम्य में दिखने वाली विभिन्न प्रकार की प्रजातियों के साथ साथ विभन्न प्रकार के जंगल जीवन भर याद रहने वाला अनुभव प्राप्त होता है।

आसपास के इलाके में सैकड़ो आकर्षण

मुदुमलाई के आसपास के इलाके में सैकड़ो आकर्षण हैं जिनमें से कुछ प्यकारा झील, कलट्टी झरना, थेप्पकाडू हाथी कैम्प, मोयर नदी और जंगली जानवरों को देखने के कई उत्कृष्ट स्थान खास हैं। प्राकृतिक सुन्दरता, घूमने फिरने लायक स्थान और ट्रेकिंग के विकल्प मुदुमलाई को पारिवारिक पिकनिक, साहसिक यात्रा और एक दिवसीय यात्रा के लिये आदर्श बनाते हैं। तो आइये जानें मुदुमलाई की यात्रा क्या ख़ास देख के आपके लिए यादगार बन सकती है।

पास ही बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान

दक्षिण भारत में अपनी तरह का पहला मुदुमलाई वन्यजीव अभ्यारण्य केरल-कर्नाटक सीमा पर स्थित है। 321 वर्ग किमी. में फैले इस अभ्यारण्य के पास ही बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान है। इन दोनों उद्यानों को मोयार नदी अलग करती है। मैसूर और ऊटी को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग इस उद्यान से होकर गुजरता है। मुदुमलाई में वन्यजीवों की अनेक प्रजातियां देखने को मिलती हैं जैसे लंगूर, बाघ, हाथी, गौर और उड़ने वाली गिलहरियां। इसके अलावा यहां अनेक प्रकार के पक्षी भी देखे जा सकते हैं जैसे मालाबार ट्रॉगन, ग्रे हॉर्नबिल, क्रेस्टिड हॉक ईगल, क्रेस्टिड सरपेंट ईगल आदि।

बाँदीपुर के बीच में प्राकृतिक सीमा

मोयर नदी भवानी नदी की सहायक नदियों में से एक है और मोयर शहर में उत्पन्न होकर मसीनागुडी-ऊटी रोड के साथ-साथ बहती है। यह मुदुमलाई अभ्यारण्य और बाँदीपुर के बीच में प्राकृतिक सीमा का कार्य करती है। कई जानवर इस नदी पर पानी पीने के लिये आते हैं इसलिये उन्हे यहाँ देखना आसान हो जाता है। मोयर नदी घाटी, जिसे मोयर दर्रा भी कहते हैं, बीस किमी गहरा है। इस विशाल घाटी को मोयर नदी में खोदा गया था और पानी अचानक उक्त ऊँचाई से इस दर्रे में गिरता है जिससे मोयर झरने का जन्म होता है।

कई पिकनिक स्पॉट

नदी के दोनों किनारों पर कई पिकनिक स्पॉट स्थित है जहाँ से कई पर्यटक इस शानदार दृश्य का आनन्द लेते देखे जा सकते हैं। मुदुमलाई संग्रहालय हाथी पोषण कैम्प के निकट एक संग्रहालय है। पिछले वर्षों में जो जानवर मुदुमलाई के जंगलों में विचरण किया करते थे उन्हें यहाँ संरक्षित किया गया है। पर्यटक संग्रहालय में इतिहास की एक झलका पा सकते हैं और जंगल के पूर्व बासिन्दों को संरक्षित रूप में तथा उनका आज का स्वरूप कैसा है, यह देखते ही बनता है।

थेप्पकाडू हाथी कैम्प

सन् 1972 में स्थापित थेप्पकाडू हाथी कैम्प यात्रियों को प्रकृति के सबसे बड़े स्थलीय जीव के साथ एक प्रतिबन्धित वातावरण में मिलने-जुलने का अवसर प्रदान करता है। थेप्पकाडू हाथी कैम्प में हाथियों को प्रशिक्षित किया जाता है और आजकल इस कैम्प में 23 हाथी रहते हैं। थेप्पकाडू हाथी कैम्प में हाथियों की सवारी भोर के साथ-साथ शाम को भी की जा सकती है।

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