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CBI के बाद RBI का नंबर, आसान भाषा में समझिए सरकार अब इस संस्था से क्यों टकरा गई

FACTS, OPINION

2014 में मोदी सरकार के आने के बाद से देश के बड़े संस्थानों का हाल देखिए. पहले सुप्रीम कोर्ट के जज आपस में लड़ बैठे, ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. फिर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के नंबर 1 और नंबर 2 ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए. और अब रिजर्व बैंक में उथल-पुथल मची हुई है. इन तीनों घटनाओं में एक कॉमन चीज है, वो है सरकार. कहीं न कहीं सरकार के दखल की वजह से ये स्थिति पनपी है. अब जो हालिया रिजर्व बैंक का मामला है, उसमें तो RBI के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने तो साफ-साफ कह दिया है कि संस्था के ऑटोनॉमी पर ही खतरा है. जिससे मॉनेटरी पॉलिसी के डगमगा जाने का संकट बना हुआ है.

फोटो- बिजनेस स्टैंडर्ड

RBI और सरकार के इस विवाद का मतलब क्या है?

हर देश में एक सेंट्रल बैंक होता है, जो उस देश के फाइनेंशियल मामलों में फैसला लेता है. भारत में वो RBI है, हर देश की सरकार अपने इन सेंट्रल बैंकों के फाइनेंशियल फैसलों की इज्जत किया करते हैं. सरकार और आरबीआई के बीच में कई मुद्दों को लेकर मतभेद भी होते हैं, लेकिन इतने बड़े नहीं की तकरार की शक्ल अख्तियार कर ले, लेकिन अपने देश में ऐसा ही हुआ है. कई जानकार बता रहे हैं कि रिजर्व बैंक और सरकार के मतभेद कुछ ज्यादा ही बढ़ गए हैं, स्थिति ऐसी है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा तक दे सकते हैं.

इतनी बदतर स्थिति आई कैसे?

दरअसल, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं जो देश में अबतक कभी नहीं हुआ. कहा ये जा रहा है कि सरकार RBI एक्ट के सेक्शन 7 को लागू कर सकती है. सेक्शन 7 के तहत सरकार रिजर्व बैंक को अपने फैसले मानने का आदेश दे सकती है. साफ-साफ कहा जाए तो अप्रत्यक्ष तौर पर रिजर्व बैंक की ऑटोनॉमी छिन सकती है. अब कहा जा रहा है कि सरकार अगर सेक्शन 7 को लागू करने पर अड़ी रही तो उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं. जिससे देश के लिए शर्मनाक स्थिति बन सकती है.

सरकार ऐसा क्यों कर रही है?

इसके कई आर्थिक और राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं. अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सरकार चौतरफा दबाव में है, जिसका असर भी दिख रहा है. सरकार को ये भी लग रहा है कि बैंकों को कर्ज देने में लगाने लगाने और ब्याज दरों के मामले में RBI सरकार की बात नहीं सुन रहा है. इसलिए सेक्शन-7 को हथियार के तौर पर सरकार इस्तेमाल कर सकती है.

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