गजब फैक्ट्स: देश के संविधान के बारे में ये 15 बेहद रोचक बातें अभी जान लीजिए

FACTS

ये तो सभी जानते हैं कि संविधान किताब भारत की सर्वोच्च शासक है. भारतीय संविधान के निर्देश ही भारत के शासक के पीछे से शासन कर रहे है. भारत के स्वतंत्र होने से पहले भारत पर अंग्रेजों के नियम और कानून लागू थे. पिछले एक इंडिया एक्ट 1935 के अनुसार सरकार भारतीय नागरिकों से पक्षपात कर उनको कई बुनियादी अधिकारों से वंचित कर दिया था लेकिन 1946 में गठन भारतीय संविधान सभा बहस और विचार विमर्श कर संविधान का जो अंतिम मसौदा तैयार किया जिसमें सभी भारतीयों को बराबरी और न्याय का अधिकार दिया है.

हमारा संविधान कानूनी तौर पर 1950 के जनवरी महीने में लागू हुआ था जिसे  हम 26 जनवरी के दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनातें है. आज हम भारत की सर्वोच्च आदरणीय किताब भारतीय संविधान से जुड़े कुछ फैक्ट्स के बारें में बताने जा रहे है जिनको जानकर आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे….

 

भारतीय संविधान ही देश का असली शासक है. देश के इस सबसे बड़ी कानून को 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया था. इसी वजह से 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

संविधान सभा को संविधान तैयार करने में कुल 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे थे

संविधान की असली कापी हिंदी और अंग्रेजी में लिखी गयी है और उनकी मूल प्रतियों को संसद के पुस्तकालय में विशेष हीलियम केसेस में रखा जाता है.

संविधान सभा समिति ने संविधान को हिंदी, अंग्रेजी में हाथ से लिखकर कैलिग्राफ किया. इसे टाइपिंग या प्रिंटिग नहीं किया गया. संविधान सभा पर कुल खर्च करीब 1 करोड़ रुपये आया था.

भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है. इसे सबसे अच्छा संविधानों में से एक माना जाता है. पिछले 69 सालों में इसमें मामूली संशोधन किया गया है.

संविधान सभा के मेंबर्स राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्य के जरिए चुने गए. जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद इस सभा के प्रमुख सदस्य थे.

11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थाई अध्यक्ष चुना गया.

संविधान में फिलाह 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में बंटा हुआ है.

संविधान जब तैयार हुआ था उस वक्त इसमें 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं.

संविधान निर्माताओं ने अपने देश के लिए फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कई देशों के संविधानों से प्रेरणा ली है. यही वजह है की भारतीय संविधान ‘उधारी का एक बैग’ कहा जाता है.

पंचवर्षीय योजनाएं, संविदान में सोवियत संघ से और सामाजिक-आर्थिक अधिकार आयरलैंड से लिया गया है.

स्वतंत्रता, समानता और हमारे प्रस्तावना में भाईचारे के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति से लिया गया है और ये सभी फ्रेंच आदर्श वाक्य है.

संविधान की प्रस्तावना अमेरिका के संविधान की प्रस्तावना से प्रेरित था. जो ‘हम लोग’ टैगलाइन के साथ शुरू होता है।

मौलिक अधिकारों को संविधान में अमेरिकी संविधान से लिया गया है.

संविधान की खास बात ये भी है की शुरुआत में, संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों में से एक था जिसे 1978 में 44वें संशोधन करके इसे खत्म कर दिया गया था.

Leave a Reply