91 के हुए BJP के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी, जानिए निजी जिंदगी से राजनीति तक की खास बातें

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आज भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) का जन्मदिन है.इस वक्त देश में बीजेपी का मुकाबला करने वाली कोई भी पार्टी नहीं है, और बीजेपी को इस मुकाम तक पहुंचाने वालों में सबसे बड़ा नाम है लालकृष्ण आडवाणी. आज जिस हिंदुत्व के एजेंडे को आगे रखकर बीजेपी यहां तक पहुंची है, उसकी शुरुआत आडवाणी जी ने ही की थी. मलाल ये है कि पार्टी का तो उन्होंने बड़ा फायदा किया लेकिन उनकी खुद की पीएम बनने की तमन्ना अब तक अधूरी ही है. 7 नवंबर 1927 को जन्मे आडवाणी जी अपना 90वां जन्मदिन मना रहे हैं.

जानते हैं कुछ खास बातें:

फोटो-http://lkadvani.in/

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म और परवरिश

पाकिस्तान के कराची में एक सिंधी संयुक्त परिवार में आडवाणी पैदा हुआ थे. रिपोट्स के मुताबिक उनके कुल मिलाकर 34 चचेरे भाई बहन थे. जिनके साथ उनकी परवरिश हुई है. आडवाणी जी की एक सगी बहन भी हैं.

उनके पिता एक संपन्न कारोबारी थे ऐसे में उनकी शुरुआती शिक्षा कराची के सबसे बड़े स्कूलों में से एक में हुई थी. महज 13 साल के जब वो थे तो उनकी माता का निधन हो गया था.

आडवाणी बचपन में पढ़ाई लिखाई में काफी तेज हुआ करते थे, जनसत्ता में छपी एक खबर के मुताबिक वो क्लास 10 तक हमेशा फर्स्ट आए थे. उन्हें इस बात का मलाल रहा कि वो लैटिन तो सीख गएऐ लेकिन संस्कृत नहीं सीख पाए. ताज्जुब की बात ये है कि हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने वाले आडवाणी ने ईसाई मिशनरी स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की थी

RSS में लालकृष्ण आडवाणी की एंट्री

साल 1942 में वो बतौर कार्यकर्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े, उन्होंने कुछ समय तक बतौर टीचर भी काम किया था. आजादी के बाद वो फुलटाइम आरएसएस से जुड़ गए, सबसे पहले वो राजस्थान में संघ की विचारधारा को मजबूत करने में लगे.

साल 1957 में उस वक्त सांसद रहे अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने के बाद आडवाणी की राह पलट सी गई. अब वाजेपेयीजी के साथ कई मोर्चों पर मिलकर वो काम करने लगे.

सियासी करियर:

– साल 1960-67 तक ऑर्गेनाइजर (आरएसएस का मुखपत्र) में वो असिस्टेंट एडिटर रहे
– 1967 में आडवाणी दिल्ली महानगर पालिका के चेयरमैन बने
– 1972 में जनसंघ का अध्यक्ष बनाया गया
– 1977 में वो देश के सूचना और प्रसारण मंत्री बनाए गए
– 1980 में बीजेपी बनी और वो महासचिव चुने गए
– 1986 में पार्टी के अध्यक्ष बने
– 1999 में डिप्टी पीएम बने
– फिलहाल छठवीं बार लोकसभा सांसद हैं

साल 1990 ने बदल दी बीजेपी की तकदीर

साल 1990 बीजेपी के लिहाज से सबसे बड़ा साल था. पार्टी के सबसे कद्दावर नेता आडवाणी ने गुजरात सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक रथयात्रा शुरु की. इस यात्रा ने यूपी समेत तमाम राज्यों की की राजनीतिक स्थिति ही बदलकर रख दी. साल 1992 में हुई बाबरी मस्जिद में भी आडवाणी के नाम पर अबतक केस चल रहा है.

क्या है हालात

ये किसी से छिपा नहीं है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने की आडवाणी ने खुलकर विरोध किया था. एक समय में आडवाणी ने ही नरेंद्र मोदी का बचाव किया था. फिलहाल, वो बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में है और पार्टी के विवादों पर कम ही बोलते हैं.

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