Knowledge Book: क्या आप जानते हैं रसोइए की एक गलती से बने थे पटाखे?

FACTS

लगता है इस बार दिल्ली वालों की दिवाली थोड़ी फिकी रहेगी, क्योंकि प्रशासन ने प्रदूषण की वजह से धमाके और प्रदूषण वाले पटाखे firecrackers  बैन जो कर दिए, लेकिन दिल्ली वाले कहां मानने वाले है। इस बार भी दिल्ली वालों ने दिवाली के मौके पर खूब पटाखे फोड़े जाएंगे, इस बार भी दिवाली से ज्यादा पटाखे सुर्खियों में हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये पटाखे हमारे देश की नहीं बल्कि चीन की एक गलती का नतीजा है। आइए आपको बताते हैं कैसे हुआ पटाखों का आविष्कार…

चीन में हुआ firecrackers का आविष्कार

ये तो सभी जानते हैं कि पटाखों का आविष्कार सबसे पहले चीन में हुआ था। दरअसल मसालेदार खाना बनाते समय एक दुर्घटना घटी, रसोइए ने गलती से साल्टपीटर (पोटैशियम नाईट्रेट) आग पर डाल दिया था। इससे उठने वाली लपटें रंगीन हो गईं, जिस से लोगों की उत्सुकता बढ़ी। फिर रसोइए के प्रधान ने साल्टपीटर के साथ कोयले व सल्फर का मिश्रण आग के हवाले कर दिया, जिससे काफी तेज़ आवाज़ के साथ रंगीन लपटें उठी। बस, यहीं से आतिशबाज़ी यानी पटाखों की शुरुआत हुई।

बनाई फायर पिल

पटाखों का पहला प्रमाण वर्ष 1040 में मिलता है, जब चीनियों ने इन तीन चीज़ों के साथ कुछ और रसायन मिलाते हुए कागज़ में लपेट कर ‘फायर पिल’ बनाई थी।

पटाखे बनाने की कला

पटाखे बनाने की कला भारत और अन्य पूर्वी देशों को भी आती थी। यहां सबसे पहले पटाखों का उत्पादन इटली ने किया था। जर्मनी के लोग युद्ध के मैदानों में इन बमों का इस्तेमाल करते थे। चीन के लोग किसी समारोह आदि में इन बमों का इस्तेमाल करते थे।

इंग्लैंड में भी इनका उपयोग

इंग्लैंड में भी इनका उपयोग समारोहों में किया जाता था। महाराजा चार्ल्स (पंचम) अपनी हरेक विजय का जश्न आतिशबाज़ी करके मनाते थे। इस तरह से 14 वीं शताब्दी के शुरू होते ही लगभग सभी देशों ने बम बनाने का काम शुरू कर दिया था।

बंदूके और तोप भी इसी कारण बनी

अमेरिका में इसकी शुरूआत 16वीं शताब्दी में मिलीट्री ने की थी। इसकी प्रतिक्रिया में पटाखें बनाने की कई कंपनियां खुली और सैकड़ों लोगों को रोज़गार मिला। बाद में पश्चिमी देशों ने हाथ से फेंके जाने वाले बम बनाए। बंदूके और तोप भी इसी कारण बनी थी।

तथ्यों की माने ते

‘बूम : द केमिस्ट्री एंड हिस्ट्री ऑफ एक्सप्लोजिव्स’  के लेखक सिमोन क्वीलेन फील्ड की माने तो, चीन में आतिशबाजी का इस्तेमाल 200 ईसा पूर्व से शुरू हुआ था, लेकिन पटाखों की शुरुआत 618-907 ईसवी पश्चात ही हुई। फील्ड के मुताबिक इस दौरान चीन का एक वैज्ञानिक अमर होने के लिए अमृत बनाने की कोशिश कर रहा था। अमृत तो नहीं बना, लेकिन उसने गन पाउडर का ईजाद कर लिया। इसी पाउडर का यूज बाद में आतिशबाजी के लिए किया गया और यही पटाखों में इस्तेमाल किया जाने वाला मसाला बना।

फील्ड के मुताबिक केमिस्ट ने अमृत बनाने के लिए सल्फर चारकोल और पोटैशियल नाइट्रेट को मिलाया। इन्हें मिलाते ही धमाका हुआ और इस तरह गन पाउडर का ईजाद हुआ।

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