बीजेपी के लिेए सिरदर्द बन सकता है सावित्री बाई फुले का इस्तीफा और कुशवाहा की नाराजगी

OPINION, PEOPLE

6 दिसंबर हमेशा बीजेपी के लिए ‘खास’ दिन रहा है. लेकिन 2018 के 6 दिसंबर को जिस तरीके से यूपी से बीजेपी सांसद और दलित मामलों पर खुलकर बोलने वाली सावित्री बाई फुले ने इस्तीफा दिया और दूसरी तरफ एनडीए सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा के तेवर दिखे. इन दोनों बड़ी घटनाओं से पार्टी बड़ा नुकसान उठा सकती है.

फोटो- सोशल मीडिया

‘आरक्षण खत्म करना चाहती है बीजेपी’

यूपी से बीजेपी सांसद फुले ने खुलकर कहा है कि बीजेपी आरक्षण को खत्म करने की साजिश रच रही है. साथ ही देश को मनुस्मृति के दमपर चलाना चाहती है. दरअसल, सावित्री बाई फुले दलित आंदोलन से लेकर कई मुद्दों पर पार्टी लाइन से अलग अपनी राय रख चुकी हैं. कभी कभार दिल्ली से बीजेपी सांसद उदित राज का भी ऐसा गुस्सा देखने को मिलता है. जाहिर है कि बीजेपी के दलित नेताओं में कोई न कोई कसक तो है ही. ऐसे में ये इस्तीफा विद्रोह की तरह है, जिसका असर दलित ‘राजनीति’ और बीजेपी के अंदर भी खूब होगा.

कुशवाहा युद्ध की तैयारी में

वहीं बिहार में एनडीए के सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सर्वेसर्वा उपेंद्र कुशवाहा भी भारी नाराज है. कई मौकों पर वो अपना गुस्सा दिखा चुके हैं. 6 दिसंबर को उनके तेवर और सख्त नजर आए, कुशवाहा कुर्मी-कोईरी वोट पर अच्छी पकड़ रखते हैं. इसी के साथ ही फिलहाल वो अति पिछड़ा वर्ग को भी साधने में जुटे हुए हैं. अगर ये फॉर्मूला काम करता है तो इसका सीधा असर नीतीश कुमार पर होगा. कुशवाहा इसलिए भी नाराज हैं कि बिहार की 40 लोकसभा सीट में से उन्हें मनमुताबिक सीट मिलती नहीं दिख रही है. न ही एनडीए बड़े फैसले के दौरान कुशवाहा को कुछ खास तवज्जो ही दे रहा है. ऐसे में उनके पाला बदलने की भी सुर्खियां सियासी गलियारों में हैं.

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