बुलंदशहर हिंसा

बुलंदशहर हिंसा: सांप्रदायिकता और भीड़ तंत्र एक दिन अपना घर ही फूंक देंगे

OPINION

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जो हुआ वो इस बात की तस्दीक है कि अब गुंडे-मवालियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं है और उन्हें साफ तौर पर संरक्षण मिला हुआ है. एक पुलिस इंस्पेक्टर की सरेआम हत्या कर दी गई. पुलिस पर जमकर पथराव किया गया और वजह क्या थी? गोकशी की कथित खबर. एक साफ सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर वो कथित गोमांस वहां आया कैसे? क्या गोमांस की ऐसी कोई खबर आएगी भी तो भीड़ को पागल होने का अधिकार किसने दिया? गाड़ियों को फूंकने या इंसान को गोली मार देने का अधिकार किसी भी हिंदू या किसी भी और धर्म के संगठन को किसने दिया? एक और सवाल है कि क्या ऐसे संगठन वाले खुद को खुदा समझ बैठे हैं या सत्ता से उनको संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण वो प्रशासन और पुलिस को कुछ नहीं समझते?

फोटो- डीएनए

इन सवालों का जवाब क्या है? कौन है जिम्मेदार?

इन सवालों का बस एक ही जवाब है, सांप्रदायिकता और भीड़तंत्र ने हिंसा को हैवान बना दिया है. इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह जिनकी हत्या इसी हिंसा में हो गई, आखिर उनकी क्या गलती थी? वो तो महज इस कोशिश में थे कि कहीं ये विवाद दंगे की शक्ल न ले ले. ये जो भीड़ है, इसका कोई धर्म नहीं होता, हत्यारे ये नहीं समझते कि किसी दिन वो भी या उनके भी परिवारवाले इस बेकाबू भीड़ का शिकार बन सकते हैं.

अबतक इस मामले में क्या हुआ?

  • तीन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है
  • 27 लोग नामजद हैं कुल 60 लोगों पर आरोप हैट
  • योगेश राज को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है
  • सुबोध सिंह की बहन का आरोप है कि पुलिसवालों ने मिलकर उनकी हत्या की है. वो दादरी के अखलाक केस की जांच कर रहे थे
  • मृतक के परिवारवालों ने मुआवजे की रकम लेने से इनकार कर दिया है
  • एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि यूपी में डर ही डर व्याप्त है, इस मामले की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेनी चाहिए

Leave a Reply