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मध्य प्रदेश का इतिहास-2: आजादी के बाद से लेकर अबतक के इतिहास की खास बातें

FACTS

मध्य प्रदेश के इतिहास सीरीज के पहले पार्ट में हमने आपको इस राज्य के पाषाणकाल से लेकर अंग्रेजों की सत्ता तक के इतिहास से रूबरू कराया था. दूसरे पार्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं देश को आजादी मिलने के बाद के इतिहास के बारे में.

फोटो- मध्य प्रदेश वेबसाइट

1950 में मध्य प्रदेश को मिली शक्ल

1947 में भारत की आजादी के बाद, 26 जनवरी, 1950 के दिन भारतीय गणराज्य के गठन के साथ सैकड़ों रियासतों का संघ में विलय किया गया था. राज्यों के पुनर्गठन के साथ सीमाओं को तर्कसंगत बनाया गया. 1950 में पूर्व ब्रिटिश केंद्रीय प्रांत और बरार, मकाराई के राजसी राज्य और छत्तीसगढ़ मिलाकर मध्यप्रदेश का निर्माण हुआ तथा नागपुर को राजधानी बनाया गया. सेंट्रल इंडिया एजेंसी द्वारा मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल जैसे नए राज्यों का गठन किया गया. राज्यों के पुनर्गठन के परिणाम स्वरूप 1956 में, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्यों को मध्यप्रदेश में विलीन कर दिया गया, तत्कालीन सी.पी. और बरार के कुछ जिलों को महाराष्ट्र में स्थानांतरित कर दिया गया तथा राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में मामूली समायोजन किए गए.

मध्य प्रदेश का इतिहास-2: आजादी के बाद से लेकर अबतक के इतिहास की खास बातें

फिर भोपाल राज्य की नई राजधानी बन गया. शुरू में राज्य के 43 जिले थे. इसके बाद, वर्ष 1972 में दो बड़े जिलों का बंटवारा किया गया, सीहोर से भोपाल और दुर्ग से राजनांदगांव अलग किया गया. तब जिलों की कुल संख्या 45 हो गई. वर्ष 1998 में, बड़े जिलों से 16 अधिक जिले बनाए गए और जिलों की संख्या 61 बन गई. नवंबर 2000 में, राज्य का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा विभाजित कर छत्तीसगढ़ का नया राज्य बना. इस प्रकार, वर्तमान मध्यप्रदेश राज्य अस्तित्व में आया, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है और जो 308 लाख हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्र पर फैला हुआ है.

अबतक का राजनीतिक इतिहास

मध्य प्रदेश के वर्तमान सीएम शिवराज सिंह चौहान है. राज्य में पिछले 15 साल यानी 2003 से ही बीजेपी सरकार है. इससे पहले साल 1993 से लेकर 2003 तक कांग्रेस के दिग्विजय सिंह राज्य के मुख्यमंत्री रहे. आजादी के बाद से लगातार साल 1977 तक राज्य में कांग्रेस का ही शासन था. इसके बाद साल 1977 में जनता पार्टी ने कब्जा जमाया.

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