भारतीय सेना खरीदेगी 41 हजार स्वदेशी लाइट मशीन गन, जानिए इनकी ताकत

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सेना ने अग्रिम मोर्चों पर तैनात जवानों को अत्याधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस करने की योजना के तहत 41 हजार लाइट मशीन गन की खरीद प्रक्रिया शुरू करते हुए इच्छुक कंपनियों से इस बारे में जानकारी मांगी है।

सेना के अनुसार इनमें से लगभग 10 हजार गन आयुध फैक्ट्रियों से और बाकी 31 हजार देश की निजी क्षेत्र की कंपनियों से खरीदी जाएंगी। गन की खरीद के लिए सेना ने अभिरूचि पत्र यानी रिक्वेस्ट फॉर इन्फोमेर्शन (आरएफपी) मांगी है। आपको बता दें रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद ने गत 28 फरवरी को सेना के लिए लाइट मशीन गन की खरीद को मंजूरी दी थी।

सेना के अनुसार उसे कम से कम 800 मीटर की दूरी तक मार करने वाली लाइट मशीन गनों की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना को लंबे समय से नई लाइट मशीन गन नहीं मिली हैं और इस खरीद प्रक्रिया के पूरा होने से उसकी लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो जाएगी।सेना ने अग्रिम मोर्चों पर तैनात जवानों को अत्याधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस करने की योजना के तहत 41 हजार लाइट मशीन गन की खरीद प्रक्रिया शुरू करते हुए इच्छुक कंपनियों से इस बारे में जानकारी मांगी है।

मशीन गन एक ऐसी बन्दूक है जो की स्वचालित रूप से एक के बाद कई गोलिया कई सो प्रति मिनट की रफ़्तार से एक साथ दाग सकती है। इन्हें मूल रूप से सब मशीन गन भी कहा जाता है। यह या तो किसी स्टैंड के उप्पर लगाके के व उस के सहयोग से प्रयोग में ली जाती है या इनके हलके प्रकार सीधे हाथ में लेकर प्रयोग में लिए जाते है।

इसके लगातार गोली चलाने के दो तरीके है। कुछ मशीन गन सीधे पिस्टन का प्रयोग करती है व आजकल ज्यादातर गैस से स्वचालित पिस्टन का. प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध में अपनी बर्बर मारने की शक्ति की वजह से पूरे विश्व की सेनाओं में यह काफी प्रचिलित हुई. कई वैज्ञानिक इसे पीछेले १०० सालो में हुए सबसे महत्वपूर्ण अविष्कारो में से एक मानते है।

 

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