राफेल घोटाले पर अब BJP हुई कॉंग्रेस पर हावी, जानिए वो बातें जो आपको हैरान कर सकती हैं

THE NATION

विवादित राफेल डील मामले की जांच की जाए या नहीं, इस पर आज सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने अपना फैसला सुना दिया है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने फ्रांस के साथ हुए 36 लड़ाकू राफेल विमान खरीदने को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया को सही ठहराया और कहा कि कीमत तय करना उसका काम नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट का राफेल पर अहम फैसला बता दें सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदी के मामले में मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी. साथ ही शीर्ष अदालत ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज किया.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है. ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. अदालत की निगरानी में राफेल सौदे की जांच कराने की मांग करने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह फैसला सुनाया.

सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर 14 नवंबर को सुनवाई पूरी की थी. राफेल लड़ाकू विमान के सौदे में अनियमित्ताओं का आरोप लगाते हुये इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का सीबीआई को निर्देश देने और न्यायालय की निगरानी में इसकी जांच के अनुरोध के साथ ये याचिकायें दायर की गयी थीं. याचिका दायर करने वालों में बीजेपी के दो नेता और पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और विनीत ढांडा तथा आप पार्टी के नेता संजय सिंह शामिल थे. (इनपुट -भाषा)

गौरतलब है कि कांग्रेस और राहुल गांधी राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मोदी सरकार पर लगातार हमले बोल रहे हैं. कांग्रेस ने इसी मामले में प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे रखा है. पार्टी का आरोप है कि राफेल विमानों की कीमत बताने के संदर्भ में मोदी और सीतारमण ने सदन को गुमराह किया.

फोटो-एनडीटीवी

आइए जानते हैं इस सौदे के बारे में, कांग्रेस के आरोप और बीजेपी की सफाई की जानकारी.

कांग्रेस दावा किया कि फ्रांस के साथ 36 राफेल विमान की खरीद का समझौता होने के बाद इस विमान सौदे से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से लेकर एक निजी भारतीय समूह की रक्षा कंपनी को दिया गया जबकि यह कंपनी समझौते से 12 दिन पहले पंजीकृत हुई थी और उसके पास विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है. कांग्रेस के मुताबिक इस निजी भारतीय कंपनी ने पिछले साल 16 फरवरी को बयान जारी कर कहा कि उसे राफेल से जुड़ा 30,000 करोड़ रुपये का ‘ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट’ और 1,00,000 एक लाख करोड़ रुपये का ‘लाइफ साइकल कॉन्ट्रैक्ट’ मिला है.

राफेल विमान सौदा क्या है?

फ्रांस के रफाल फाइटर जेट को दुनिया में सबसे शक्तिशाली और बेहतरीन माना जाता है. भारत 36 रफाल विमानों को खरीद चुका है इसकी कीमत है 7.8 अरब डॉलर. ये सौदा यूपीए की सरकार में शुरू हुआ था तब से कीमतों में फेरबदल हुई हैं. उम्मीद है कि अगले साल सितंबर में भारत को पहला राफेल जेट मिल जाए.

राफेल की खासियत

रिपोर्ट्स के मुताबिक रफाल में ये सारी खूबियां हैं.

  • राफेल की अधिकतम रफ्तार 192 किलोमीटर प्रति घंटा है और ये एकबार में 3700 किलोमीटर तक सफर कर सकता है.
  • राफेल विमान से परमाणु मिसाइल भी लॉन्च किए जा सकते हैं.
  • हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए दुनिया के सबसे एडवांस सिस्टम इस फाइटर प्लेन में मौजूद.
  • राफेल में दो तरह की मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर है.
  • राफेल जैसा एडवांस फाइटर प्लेन पाकिस्तान और चीन के पास भी नहीं.

कांग्रेस का आरोप क्या है?

  • कांग्रेस का दावा है कि हर जेट की कीमत 1570.8 करोड़ रूपये है
  • UPA के समय में इस विमान के लिए 526.1 करोड़ रूपये पर सहमति बनी थी
  • ये विमान इसी कंपनी ने कतर को 694.8 करोड़ रूपये में बेचा गया तो ये 100 फीसदी अधिक दाम पर भारत को क्यों बेचा गया

कांग्रेस ने कहा है कि उसे इस सौदे में घोटाले की दुर्गंध आ रही है. दाल में कुछ काला है. प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं. राहुल गांधी का अब कहना है कि भ्रष्टाचार होने, मोदीजी को बचाने, मोदी के मित्रों को बचाने और इसमें सबको बचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है.”

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