‘भारतीय इतिहास’  में कूटनीति से लड़ा गया प्रसिद्ध खेड़ा का युद्ध

THE NATION

खेड़ा का युद्ध ‘भारतीय इतिहास’ में लड़े गये प्रसिद्ध युद्धों में से एक है। यह युद्ध छत्रपति शिवाजी के पौत्र शाहू और ताराबाई की सेना के मध्य अक्टूबर, 1707 ई. में हुआ। इस युद्ध में शाहू की विजय हुई और उसने 22 जनवरी, 1708 ई. को सतारा में अपना राज्याभिषेक करवाया। शाहू के नेतृत्व में नवीन मराठा साम्राज्यवाद के प्रवर्तक पेशवा लोग थे, जो छत्रपति शाहू के पैतृक प्रधानमंत्री थे, जिनकी सहायता से शाहू मराठों का एकछत्र शासक बन गया।

malicethoughts.blogspot.com

शिवाजी द्वितीय

शाहू, जिसे ‘शिवाजी द्वितीय’ के नाम से भी जाना जाता था, छत्रपति शिवाजी का पौत्र तथा शम्भुजी और येसुबाई का पुत्र था। 1689 ई. में रायगढ़ के पतन के बाद शाहू, उसकी माँ येसूबाई एवं अन्य महत्त्वपूर्ण मराठा लोगों को क़ैद कर मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के शिविर में नज़रबन्द कर दिया गया।

बालाजी विश्वनाथ और रणोजी सिन्धिया

औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद शाहू अपने कुछ साथियों के साथ वापस महाराष्ट्र आ गया था, जहाँ पर परसोजी भोंसले (रघुजी भोंसले तृतीय), भावी पेशवा बालाजी विश्वनाथ और रणोजी सिन्धिया ने उसका साथ दिया।

ताराबाई के विरुद्ध युद्ध की घोषणा

शाहू ने सुयोग्य व्यक्ति बालाजी विश्वनाथ को पेशवा के पद पर आसीन किया। शाहू ने सतारा पर घेरा डालकर वहाँ की तत्कालीन शासिका राजाराम की विधवा पत्नी ताराबाई (शाहू की चाची) के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। ताराबाई ने धनाजी जादव के नेतृत्व में एक सेना को शाहू का मुक़ाबला करने के लिए भेजा।

खेड़ा का युद्ध

अक्टूबर, 1707 ई. में प्रसिद्ध ‘खेड़ा का युद्ध’ हुआ, परन्तु कूटनीति का सहारा लेकर शाहू ने जादव को अपनी ओर मिला लिया। ताराबाई ने अपने सभी महत्त्वपूर्ण अधिकारियों के साथ पन्हाला में शरण ली। शाहू ने 22 जनवरी, 1708 ई. को सतारा में अपना राज्याभिषेक करवाया।

Azab Gazab

Leave a Reply