154वीं जयंती: अंग्रेजी हुकूमत के ताबूत की आखिरी कील लाला लाजपत राय

PERSONALITIES

लाला लाजपत राय उन क्रांतिकारी नेताओं में से एक थे जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने के लिए भारतीय राष्ट्रवाद का झंड़ा बुलंद किया था। लाला लाजपत राय एक ऐसे क्रांतिकारी नेता थे जो अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ शेर की तरह दहाड़ते थे जिससे बड़े-बड़े ब्रिटिश अफसरों की रूहें कांप जाती थी और यही कारण था कि उन्हें ‘पंजाब का शेर’ भी कहा जाता था।
पंजाब के मोंगा जिले में 28 जनवरी 1865 को उर्दू के अध्यापक राधाकृष्ण के घर लाला लाजपत राय का जन्म हुआ था।


देश के लिए किया बहुत कुछ
आज देश में पंजाब नेशनल बैंक की तमाम शाखाएं जो हम देख रहे है वो लाला लाजपत राय जी की ही देन है। इतना ही नही शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका बहुत बड़ा योगदान है ‘दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालय’ जिसे आज हम डीएवी के नाम से जानते है इसे देश में एक नई पहचान देने वाले भी लाल जी ही थे। लाला जी कांग्रेस में गरम दल के नेता थे।


लाल-बाल-पाल की त्रिमूर्ति
लाला जी ने महाराष्ट्र के लोकमान्य बाल गंगाधर तिलाक और बंगाल के बिपिन चंद्र पाल के साथ मिलकर कांग्रेस के भीतर ही ‘गरम दल’ की मौजूदगी दर्ज कराई। इन तीनों को उस वक्त लाल-बाल-पाल की त्रिमूर्ति के तौर पर भी जाना जाता था


साइमन कमीशन
संवैधानिक सुधारों के तहत 1928 में साइमन कमीशन भारत आया इस कमीशन में एक भी भारतीय प्रतिनिधि नहीं देखकर भारतीयों का गुस्सा भड़क गया। 30 अक्टूबर, 1928 को साइमन कमीशन जब लाहौर पहुँचा तो जनता के विरोध और आक्रोश को देखते हुए यहां धारा 144 लगा दी गई।


क्रांतिकारियों पर लाठी चार्ज
साइमन कमीशन का विरोध जताने के लिए लाला लाजपत राय सहित कई क्रांतिकारियों ने लाहौर रेलवे स्टेशन पर ही साइमन कमीशन का विरोध जताते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए। और ‘साइमन वापस जाओ’का लगाया लगाया। इस नारे से नाराज अंग्रेजी हुकूमत ने पुलिस को क्रांतिकारियों पर लाठी चार्ज का आदेश दे दिया।


ब्रिटिश राज के ताबूत की आखिरी कील
साइमन कमीशन के विरोध के वक्त शरीर पर चोट लगने के बाद उन्होंने कहा था कि उनके शरीर पर मारी गई लाठियां हिन्दुस्तान में ब्रिटिश राज के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित होंगी। उनकी मौत के एक महीने बाद 17 दिसंबर 1928 को उनकी मौत का बदला लेते हुए ब्रिटिश पुलिस के अफसर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया। जिसके बाद भारत में अंग्रेजों के खिलाफ उठी आवाज को और दम मिला।


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