मोदी सरकार की ‘आरक्षण पर राजनीति’, क्या है जनता की राय?

Dhang Ki Baat, PEOPLE

नरेंद्र मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने की तैयारी कर ली है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सवर्ण समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने का मोदी कैबिनेट ने फैसला किया है. मोदी सरकार इसके लिए संविधान संशोधन बिल लेकर आएगी, इस आरक्षण को 50 फीसदी दायरे से अलग रखा जाएगा. आर्थिक रूप से कमजोर तबका उनको माना जा सकता है कि जिन परिवारों की आय 8 लाख रुपये से कम है. विपक्ष इसे झुनझुना बता रहा है तो सरकार के सहयोगी इसे ऐतिहासकि कदम के तौर पर पेश कर रहे हैं.

सवर्ण आरक्षण पर क्या है लोगों की राय?

ऐसे में हमने मध्य प्रदेश और दिल्ली के कई लोगों से इस विषय पर उनकी राय जाननी चाही. पहले जानते हैं इस पेशकश का लाभ जिनको मिलने वाला है उस वर्ग का क्या है कहना? मध्य प्रदेस के जबलपुर के अग्रवाल सभा के संयोजक रूपेश अग्रवाल इसे बड़ी पहल बताते हैं. हालांकि, उनका मानना है कि ये आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने का फॉर्मूला सभी वर्गों में अपनाना चाहिए.

तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास अधिकारी विकास चतुर्वेदी का कहना है कि इस बारे में पीएम का निर्णय सराहनीय है लेकिन इस बारे में विस्तार से विचार करना चाहिए. उन्हें लगता है कि ये बहुत तर्कसंगत है कि कोई भी अगर आर्थिक रूप से पिछड़ा है भले ही वो किसी भी समाज का हो उसे आगे बढ़ने का मौका मिलना ही चाहिए. उज्जैन में बतौर शिक्षक काम कर रहे नंद किशोर जादमे कहते हैं कि इससे सवर्ण समाज के कमजोर वर्ग भी मुख्यधारा में आ सकेंगे. दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे जितेंद्र दुबे मानते हैं कि इससे सवर्ण जातियों को फायदा हो न हो मोदी सरकार को जरूर फायदा होगा.

अभी आरक्षण मिलने में लग सकता है वक्त

इस पेशकश को सदन में पास होने में वक्त लगेगा, राज्यसभा में एनडीए का बहुमत में न होना भी एक बड़ा रोड़ा है. लेकिन इस प्रस्ताव ने राजनीतिक गलियारों में आरक्षण का तेज राजनीतिक रंग जरूर घोल दिया है. जबलपुर से नीलेश सिंह ठाकुर की रिपोर्ट.

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