तोप से उड़ा था जिस देशभक्त का धड़, 161 साल बाद इंग्लैंड में मिली खोपड़ी

THE NATION

1857 का भारतीय विद्रोह तो सबको पता होगा। अंग्रेजों के खिलाफ इसे भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा जाता है, जिसे सिपाही विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है। इस क्रांति में कई देशभक्त सैनिक मारे गए थे। उन्हीं में से एक देशभक्त के अवशेष आज 161 साल बाद इंग्लैंड में मिले हैं, जिसे 1857 की क्रांति में अंग्रेजों ने ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया के सामने ही तोप से उड़ा दिया था। 


रिसर्च में हुआ खुलासा
रिसर्च में खुलासा हुआ है कि उस देशभक्त का नाम हवलदार आलम बेग था, जो विद्रोह कर रही 46 रेजीमेंट बंगाल नॉर्थ इंफ्रेंट्री बटालियन का नेतृत्व कर रहे थे। इंग्लैंड के वैज्ञानिक वेंगर ने खुलासा किया है कि वह उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी थे। इसी देशभक्त की खोपड़ी इंग्लैंड में मिली है।


स्वतंत्रता सेनानी आलम बेग की खोपड़ी
खोपड़ी मिलने के बाद इतिहासकारों ने सवाल उठाए तो इसकी जांच हुई और आखिर में इस बात पर मुहर लगी कि यह स्वतंत्रता सेनानी आलम बेग की ही खोपड़ी है। इसके बाद वैज्ञानिक वेंगर ने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जेएस सहरावत से संपर्क किया और उनके साथ पूरा रिसर्च साझा किया। अब प्रोफेसर जेएस सहरावत ने उनसे खोपड़ी उन्हें देने के लिए चिट्ठी लिखी है। 


282 सैनिकों में से अकेले हवलदार आलम बेग जिंदा बचे थे
जानकारी के मुताबिक, 1857 की क्रांति में करीब 282 सैनिक मारे गए थे। अमृतसर के अजनाला में देशभक्तों की मिली हड्डियों व अवशेषों पर प्रोफेसर सहरावत शोध कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन्हीं सैनिकों का आलम बेग नेतृत्व कर रहे थे। क्रांति में शामिल 282 सैनिकों में से अकेले हवलदार आलम बेग जिंदा बचे थे, लेकिन बाद में उन्हें जम्मू के पास रावी नदी पर पकड़ लिया गया। इस बात का पता जब ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी कूपर को चला तो उसने ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया को आलम बेग का सिर भेंट करने की योजना बनाई। 


आलम बेग को तोप से उड़ा दिया गया
सियालकोट, जो अब पाकिस्तान में है, वहीं पर रानी के सामने ही देशभक्त आलम बेग को तोप से उड़ा दिया गया। उनके सिर को ग्रिसली ट्रॉफी नाम दिया गया, जिसे साल 1858 में इंग्लैंड ले जाया गया। अब हाल ही में इंग्लैंड के एसेक्स शहर में स्थित लॉर्ड क्लाइड पब की बिक्री हुई तो नए पब मालिक ने सफाई करवाई, जिसमें एक खोपड़ी मिली। उसी की आंख में एक आधी गली हुई चिट्ठी थी। यह बात वैज्ञानिक वेंगर को पता लगी तो उन्होंने पूरा रिसर्च किया। 


कभी न थकने वाला इंसान
खोपड़ी की आंख में रखी गई चिट्ठी से कई खुलासे हुए। उसमें लिखा था कि आलम बेग को जब तोप से उड़ाया गया था, उस समय उनकी उम्र महज 32 साल थी। कद पांच फीट सात इंच था। शरीर सुडौल था। वह कभी न थकने वाला इंसान दिख रहा था। रिकॉर्ड में अंग्रेजों ने उस समय लिखा था कि आलम बेग सच्चा देशभक्त था जो किसी भी हाल में झुकने का तैयार नहीं था।


खोपड़ी का डीएनए टेस्ट
प्रोफेसर जेएस सहरावत का कहना है कि खोपड़ी का पूरा सर्च रिकॉर्ड उन्हें मिल गया है, जिसके बाद उन्होंने खोपड़ी के लिए वहां के वैज्ञानिकों से संपर्क किया है। उनका कहना है कि खोपड़ी मिलने के बाद उसका डीएनए टेस्ट किया जाएगा और उसके बाद उनके परिजनों का पता लगाया जाएगा।

Azab Gazab

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