गजब गांव-2 : देश के इस गांव में 90 फीसदी लोग शिक्षक हैं..आखिर क्या सोच है इसके पीछे ?

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ये हमारी वेबसाइट की गजब गांव सीरीज है. इस सीरीज में हम आपको देश के कुछ ऐसा गांव से मुखातिब करा रहे हैं. जिसके बारें में कुछ ना कुछ तो बेहद खास है. कोई गांव दूसरे गांवों के लिए मिसाल है तो कोई अपने अजब-गजब रहन सहन के कारण मशहूर. इसी कड़ी में आज हम आपको ले चलते हैं गुजरात के नवसारी जिले के एक गांव में जहां करीब 90 फीसदी लोग शिक्षक हैं.-

सौजन्य- http://picssr.com/photos/zk2119
  • नवसारी जिले का कुकेरी गांव आज देशभर में मशहूर हो रहा है इस गांव के 90 फीसदी लोग शिक्षक हैं.
  • करीब हर घरों में बसे ये शिक्षक या तो गांव में ही शिक्षा दे रहे हैं. अगर गांव का कोई शहर में गया है या किसी और राज्य में गया है तो वो भी शिक्षण का ही काम कर रहा है.
  • पढ़ने, पढाने का ये सिलसिला 1952 से चलता आ रहा है. एक परिवार का कोई शिक्षक बना, फिर ये सिलसिला आगे बढ़ता ही गया.
  • कई परिवार तो पीढ़ी दर पीढ़ी शिक्षण का काम करते आ रहे हैं. 85 साल के परमार जी खुद शिक्षक हैं, उनके तीन बेटे भी शिक्षक हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके घर के 25 लोग अब तक शिक्षण का काम कर रहे हैं.
  • इस गांव में अगर अनपढ़ ढूंढेंगे आप तो ढूंढते रह जाएंगे कोई नहीं मिलेगा. कारण है कि शिक्षकों ने इस गांव को पूर्ण साक्षर बनाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है. हर एक बच्चा साक्षर हो यहीं इनका लक्ष्य है.
  • साक्षरता की मिसाल बने इस गांवों में पढाई के लिए अब आधुनिक लैपटॉप और दूसरे उपकरणों का भी इस्तेमाल होने लगा है.
  • जहां दूसरे कई गांवों में आज भी बच्चे लैपटॉप जानते ही नहीं, जानते हैं तो उसे टेलीविजन की ही तरह समझते हैं. इस गांव और इसके आसपास के गांव में बच्चे पढाई के लिए लैपटॉप का सधा हुआ इस्तेमाल भी कर रहे हैं.
  • गुजरात का ये गांव ना केवल अपनी पीढ़िया सुधार रहा है, बल्कि देश के दूसरे गांव के लिए एक मिसाल भी है. कुकेरी गांव की ये कहानी बताती है कि शिक्षक चाहे तो गांव, समाज, देश अब भी बदल सकता है.

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