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राफेल डील से जुड़ी फाइल रक्षा मंत्रालय से चोरी हुई या नहीं? पूरा माजरा क्या है?

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राफेल डील मामले में एक नया माजरा सामने आ गया है. 6 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने बताया कि राफेल डील से जुड़े दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं. फिर इसकी पुष्टि करते हुए सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा कि राफेल केस में जो पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है वो इन्हीं दस्तावेजों पर बेस्ड है. मामला बढ़ा और पूरे देशभर से राफेल डील की फाइल चोरी होने के लेकर तरह-तरह की प्रतियाक्रियाएं आने लगी. विपक्ष ने पुरजोर हमला किया.

फोटो- स्क्रॉल

राफेल फाइल चोरी पर आ गई सफाई

शायद इसी हमले को देखते हुए 8 मार्च को अटॉर्नी जनरल सफाई के मोड में आ गए. अब उनका कहना है कि राफेल की फाइल चोरीही नहीं हुई. जो उन्होंने कहा था उसे गलत तरीके से पेश किया गया.

क्या है ये फाइल और हुआ क्या है?

फोटो-सोशल मीडिया

दरअसल, राफेल विमानों को लेकर जो डील हुई है, उससे जुड़े दस्तावेज, रक्षा मंत्रालय के पास हैं. अब इसी दस्तावेजों का हवाला देते हुए द हिंदू अखबार ने रिपोर्ट छाप दी. और उसी जानकारी के आधार पर यशवंत सिन्हा, प्रशांत भूषण और अरुण शौरी ने सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी. जिसपर सुनवाई हो रही है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और केएम जोसेफ की बेंच ओपन कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं.

राफेल को लेकर सरकार पर आरोप क्या-क्या हैं?

फोटो- सोशल मीडिया

  • दावा है कि हर राफेल जेट की कीमत इस नए डील में करीब 1600 करोड़ रूपये है लेकिन UPA के समय में इस विमान के लिए 526.1 करोड़ रूपये पर सहमति बनी थी.
  • राफेल विमान दसॉ कंपनी ने ही कतर को 694.8 करोड़ रूपये में बेचा गया तो ये 100 फीसदी अधिक दाम पर भारत को इस कंपनी ने क्यों बेचा.
  • एचएलएल की जगह अनिल अंबानी की कुछ दिन पहले बनी कंपनी को तवज्जो क्यों दी गई.

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