मायावती के सामने सरेंडर क्यों हैं अखिलेश यादव?

Dhang Ki Baat, PERSONALITIES

अखिलेश यादव को आखिर हुआ क्या है? ये सवाल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से लेकर हालिया लोकसभा चुनाव तक पूछा जाना चाहिए. आप देखिए कि किस तरह अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव के लिए जहां कांग्रेस के हाथ का साथ लिया तो अब लोकसभा चुनाव के लिए बीएसपी के हाथी की सवारी कर रहे हैं.

इस बीच उनके सामने तमाम तरह की मुश्किलें भी आई परिवार में मतभेद हुआ चाचा अलग हो गए पिताजी नाराज. इसी के साथ समाजवादी पार्टी के वो तमाम समर्थक जो शिवपाल के समर्थक माने जाते थे, उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया. मुलायम सिंह के गाहे बगाहे आए बयानों के बाद से तो समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं का एक धड़ा भी अखिलेश यादव से नाराज ही रहता है, भले ही वो नाराजगी खुलकर सामने नहीं आती है. रही सही कसर एसपी-बीएसपी गठबंधन ने पूरी कर दी.

फोटो- वी द इंडियन

गेस्टहाउस कांड को भूल गए कार्यकर्ता?

साल 1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद से ही दोनों पार्टियों के सुप्रीम नेता एक दूसरे को फूटे आंख नहीं सुहाते थे, कार्यकर्ता हमेशा लड़ने को तैयार रहते थे. अचानक उन्हें साथ काम करने का फरमान सुना दिया गया. इसमें भी ध्यान देने वाली बात ये है कि बैकफुट पर अखिलेश यादव ही नजर आए, इस गठबंधन के बनने से पहले ही अखिलेश यादव बीएसपी और मायावती के साथ काम करने को बेताब दिखे, एक के बाद एक कई बयान दिए कि वो बीएसपी के साथ काम करना चाहते हैं, मुलायम सिंह की खुली नाराजगी को भी उन्होंने ताक पर रख दिया. गठबंधन तो कैसे-कैसे हो गया, कार्यकर्ताओं के दिल मिले या नहीं उसका पता नहीं चल सका है, जानकार बताते हैं कि ग्राउंड लेवल पर अब भी दोनों पार्टी के कार्यकर्ता एक साथ काम करते वक्त सहज महसूस नहीं करते हैं. एक और बड़ी बात गठबंधन होने के बाद भी मायावती के तेवर कम नहीं हुए हैं, हाल ही में उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं से अनुशासन सीखने की नसीहत दे दी. इस बयान पर अखिलेश ने कोई टिप्पणी भी नहीं की, अब आप सोचिए कि क्या समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता क्या इस बात से खुश होंगे.

फोटो-अखिलेश यादव ट्विटर

सीट बंटवारे में अखिलेश बैकफुट पर

इस लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे की भी स्थिति यही है कि वो भी देखकर आप अखिलेश यादव को यही पूछेंगे कि आखिर आपको हो क्या गया है. 37 सीटों पर एसपी लड़ रही है 38 सीटों पर बीएसपी, एसपी की इन 37 सीटों में भी लखनऊ की सीट, जहां से राजनाथ मैदान में हैं, बनारस की सीट जहां से नरेंद्र मोदी हैं, गोरखपुर की सीट, कानपुर की सीट है, मतलब ये कि इन सीटों पर करीब-करीब एसपी की हार तय है, तो गठबंधन में भी ज्यादातर ऐसी सीटों पर अखिलेश यादव कैसे मान गए. क्या उनके कार्यकर्ता ये नहीं पूछ रहे होंगे….

पीएम कौन बनेगा?

फोटो – ट्विटर

दूसरी बात, मुलायम सिंह यादव के अरमानों को पीछे छोड़ अब अखिलेश, मायावती को पीएम बनाने की बात कर रहे हैं, उधर पश्चिम बंगाल से ममता पीएम बनने को तैयार हैं, आंध्र से चंद्रबाबू नायडू तैयार हैं….कांग्रेस के राहुल गांधी तो मैदान में हैं ही…मतलब साफ है कि अगर विपक्ष को ज्यादा सीटें भी मिलती हैं तो भी कोई एक राय नहीं है….अखिलेश भी अनिश्चितता में फंसे है. कुल मिलाकर बात ये है कि परिवार की स्थिति से लेकर अपनी पार्टी और इन चुनाव में अखिलेश यादव कंफ्यूज दिख रहे हैं, जिसका खामियाजा उन्हें और उनकी पार्टी को भुगतना पड़ सकता है.

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